Tuesday, February 10, 2026
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न पूर्व आर्मी चीफ नरवणे ने झूठ बोला, न पेंगुइन पब्लिकेशन ने… राहुल गाँधी ‘चोरी का माल’ लेकर मचा रहे हैं हल्ला: जानिए ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन का पूरा सच

संसद से लेकर सोशल मीडिया तक, पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars Of Destiny) को लेकर घमासान मचा है। राहुल गाँधी का दावा है कि या तो पेंगुइन पब्लिशर झूठ बोल रहा है या फिर पूर्व आर्मी चीफ। राहुल गाँधी सदन में किताब की कॉपी लहराते हुए कह रहे हैं कि जब नरवणे जी ने 2023 में इसे ‘उपलब्ध’ बताया था, तो पेंगुइन अब इसे ‘अप्रकाशित’ क्यों कह रहा है? लेकिन हकीकत यह है कि न पब्लिशर झूठ बोल रहा है और न जनरल नरवणे। असल में राहुल गाँधी प्रकाशन (Publishing) की प्रक्रिया को समझने में चूक कर रहे हैं।

2023 का ट्वीट और अमेजन का ‘प्री-ऑर्डर’ खेल

दिसंबर 2023 में जनरल नरवणे ने X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया था कि उनकी किताब उपलब्ध है और अमेजन का लिंक दिया था।

राहुल गाँधी इसे ही ‘अंतिम सच्चाई’ मान रहे हैं। लेकिन पब्लिशिंग की दुनिया में जब कोई बड़ी किताब आती है, तो छपने से महीनों पहले उसकी ‘लिस्टिंग’ अमेजन पर कर दी जाती है और ‘प्री-ऑर्डर’ लिए जाते हैं। 2023 में यही हुआ था। किताब का ISBN नंबर (9780670099757) भी जारी हो गया था, जिसका मतलब सिर्फ यह है कि किताब की पहचान दर्ज हो गई है, यह नहीं कि वह छपकर दुकानों में आ गई है।

पेंगुइन क्यों कह रहा है कि किताब नहीं छपी?

पेंगुइन इंडिया ने साफ किया है कि किताब अभी ‘प्रकाशन की प्रक्रिया’ में ही नहीं गई है। इसकी वजह यह है कि जनरल नरवणे जैसे बड़े सैन्य अधिकारी की किताब में गलवान और संवेदनशील राजनीतिक फैसलों का जिक्र है।

नियमानुसार, ऐसी किताबों के लिए रक्षा मंत्रालय से ‘क्लियरेंस’ लेना पड़ता है। यह क्लियरेंस 2024 से पेंडिंग है। जब तक सरकार हरी झंडी नहीं देती, पब्लिशर किताब नहीं छाप सकता। इसीलिए पेंगुइन ने प्री-ऑर्डर कैंसल कर दिए और लिस्टिंग हटा दी। यानी किताब आज भी कानूनी रूप से ‘अनपब्लिश्ड’ ही है।

राहुल के हाथ में जो कॉपी है, वो ‘चोरी का माल’ है

राहुल गाँधी जिस हार्डकॉपी या पीडीएफ का जिक्र कर रहे हैं, उसे लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने FIR दर्ज की है। दरअसल, किताब का ‘प्री-प्रिंट टाइपसेट’ (छपाई से पहले का कच्चा ड्राफ्ट) कहीं से लीक हो गया है और व्हाट्सएप पर घूम रहा है।

पेंगुइन का कहना है कि यह कॉपीराइट का उल्लंघन और चोरी है। राहुल गाँधी इसी ‘लीक’ हुई अनधिकृत कॉपी को आधार बनाकर सरकार को घेर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वह वर्जन अभी ऑथेंटिक (प्रामाणिक) है ही नहीं।

प्रक्रिया और नियमों का फेर

सीधी बात यह है कि नरवणे ने 2023 में प्री-ऑर्डर के हिसाब से उसे ‘उपलब्ध’ कहा था। पेंगुइन 2026 में सही कह रहा है कि क्लियरेंस न मिलने के कारण उन्होंने आज तक एक भी पन्ना नहीं छापा है। राहुल गाँधी पुराने ट्वीट और आज की स्थिति के बीच के ‘गैप’ और ‘सरकारी क्लियरेंस’ की प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रहे हैं। किताब छपेगी या नहीं, यह पूरी तरह रक्षा मंत्रालय के क्लियरेंस पर निर्भर ह

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