आपने अक्सर देखा होगा राजीव शुक्ला अंबानी परिवार का बेहद करीबी है और मुकेश अंबानी के परिवार में कोई भी फंक्शन हो तब सबसे पहले पत्तल चाटने राजीव शुक्ला वहां मौजूद रहता है
अब आप सोच रहे होंगे कि यूपी के कानपुर का कभी एक बेहद साधारण गरीब परिवार का व्यक्ति राजीव शुक्ला मुकेश अंबानी का इतना करीबी कैसे ??
तो उसकी बड़ी रोचक कहानी है और यह कहानी गुजरात से शुरू होती है
गुजरात में चिमन भाई पटेल जो कभी कांग्रेसी थे इंदिरा गांधी को ठेगा दिखाते हुए गुजरात कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर एक नया गुट बनाते है और मुख्यमंत्री बने रहते हैं
इंदिरा गांधी इससे बड़ी आहत हुई क्योंकि इंदिरा गांधी को लगा की चिमन भाई पटेल की देखा देखी दूसरे तमाम राज्यों के नेता भी बगावत कर सकते हैं या उनके आदेश नहीं मान सकते हैं इसलिए चिमन भाई पटेल को इंदिरा गांधी सबक सिखाना चाहती थी
इंदिरा गांधी ने बहुत से तरीके पर काम किया जैसे इंदिरा गांधी ने विश्व बैंक को बोलकर सरदार सरोवर परियोजना के लिए फंडिंग बंद करवा दी
लेकिन चिमन भाई पटेल इंदिरा गांधी से भी दो कदम आगे थे उन्होंने तुरंत पब्लिक बांड जारी करके जनता से अपील किया कि आप पैसा दीजिए बदले में आपको यह बांड मिलेगा जो गुजरात सरकार आपको बाद में ब्याज के साथ वापस करेगी और इस तरह मात्र एक महीने में उस जमाने में 500 करोड रुपए जुटा लिए जो विश्व बैंक की फंडिंग से भी ज्यादा थी
इंदिरा गांधी एकदम बहुत भौचक्की रह गई
फिर उस वक्त गुजरात कांग्रेस के कुछ नेता जिसमें रतु भाई अदानी मधुसूदन मिस्त्री प्रमुख थे उन्होंने इंदिरा गांधी से कहा कि यदि सरदार सरोवर परियोजना को चिमनभाई पटेल ने पूरा कर दिया तब समझ लीजिए कि चिमन भाई पटेल को हम जिंदगी में कभी हरा नहीं पाएंगे इसीलिए आप कुछ भी करके इस परियोजना को रुकवा दीजिए और उन्होंने बाकायदा इंदिरा गांधी को पत्र लिखा और यह पत्र तब सामने आया जब मोदी सरकार ने सरदार सरोवर परियोजना से संबंधित तमाम पत्र व्यवहारों को पब्लिक डोमेन में डाले उन्हें D-क्लासिफाई करके सार्वजनिक किया
गुजरात कांग्रेस ने इंदिरा गांधी को सलाह दिया की परियोजना को लटकाने का सबसे अच्छा माध्यम यह है कि आप एक ट्रिब्यूनल बनाकर उसे आप सौंप दीजिए फिर बरसों बरस तक दशकों तक यह परियोजना लटक जाएगी और इंदिरा गांधी ने यही किया
कुछ वर्षों के बाद चुनाव हुआ चिमन भाई पटेल वापस जीत गए इंदिरा गांधी को बहुत धक्का लगा क्योंकि चिमन भाई पटेल पहले नेता थे जिन्होंने इंदिरा गांधी से बगावत किया था इंदिरा गांधी चिमन भाई पटेल के खिलाफ कुछ बढ़िया मुद्दा ढूंढ रही थी
चिमन भाई पटेल के अपराधियों से भी बहुत अच्छे रिश्ते थे खासकर अब्दुल लतीफ तो चिमन भाई का ही पाला पोसा था कई बार पुलिस उसे ढूंढती थी तो वह मुख्यमंत्री के घर में मिलता था
फिर चिमन भाई पटेल अहमदाबाद के बाहरी इलाके से जा रहे थे जो आजकल श्यामल चार रस्ता के नाम से जाना जाता है वहां उन्हें एक बेहद खूबसूरत और बड़ा विशाल बंगला दिखा चिमनभाई पटेल को वो बंगला बेहद पसंद आया फिर पता चला कि उस बंगले में कोई विधवा रहती हैं फिर चमन भाई पटेल ने उसे बुजुर्ग विधवा को निकलवा कर उस बंगले पर कब्जा कर लिया
अब अगर राज्य का मुख्यमंत्री किसी के बंगले पर कब्जा करें तो किसी मीडिया में हिम्मत नहीं होगी कि वह इस खबर को ब्रेक करें और ना ही पुलिस की हिम्मत होगी कि वह कार्रवाई करें इसीलिए यह खबर किसी भी मीडिया में नहीं आई
उसी वक्त राजीव शुक्ला जो कुछ मीडिया के लिए फ्रीलांस का काम करता था और उसके बड़े भाई दैनिक जागरण में पत्रकार थे उसे यह घटना के बारे में पता चला फिर वह अहमदाबाद आया इस घटना के बारे में पूरी जानकारी जुटाया और उस वक्त धीरूभाई अंबानी जो ऑब्जर्वर मीडिया ग्रुप के मालिक थे उनके पास यह स्टोरी लेकर गया और कहा कि आप यह स्टोरी छाप दीजिए इससे इंदिरा गांधी खुश हो जाएगी
धीरूभाई अंबानी ने अपनी ऑब्जर्वर मीडिया ग्रुप में यह खबर ब्रेक किया पूरे भारत में सनसनी फैल गई चिमन भाई पटेल की काफी बदनामी हुई बहुत किरकिरी हुई और फिर इंदिरा गांधी अहमदाबाद आई और यहां पर उन्होंने सभा को संबोधित किया उसे बुजुर्ग महिला को स्टेज पर बुलाया गया हालांकि चिमन भाई पटेल ने इतनी बदनामी के बाद भी बंगला खाली नहीं किया लेकिन वह धीरे-धीरे राजनीति में गायब हो गए चुनाव हारते गए
फिर धीरूभाई अंबानी इंदिरा गांधी के गुड बुक में आ गए क्योंकि वह जमाना लाइसेंस और परमिट राज का था तो धीरूभाई अंबानी ने बहुत से लाइसेंस और परमिट लिए लेकिन धीरूभाई अंबानी सबसे ज्यादा एहसानमंद राजीव शुक्ला के हुए क्योंकि यह पूरी स्टोरी राजीव शुक्ला ने लाई थी और इस तरह से राजीव शुक्ला भी अंबानी परिवार का चाहिता बन गया






