अलवर. जिले के उद्योग नगर थाना क्षेत्र के गोलेटा गांव में जबरन धर्मांतरण से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है. पुलिस ने छापेमारी कर 52 नाबालिग बच्चों को एक हॉस्टल से मुक्त कराया है. आरोप है कि इस हॉस्टल में बच्चों को शिक्षा और पैसों का लालच देकर उनका धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा था.
अलवर एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि हिंदू संगठनों और मुखबिर की सूचना पर बुधवार शाम को एमआईए थाना पुलिस ने ईसाई मिशनरी से जुड़े हॉस्टल पर छापामार कार्रवाई की. इस दौरान पुलिस ने गुजरात के अहमदाबाद निवासी अमृत और अलवर के रामगढ़ निवासी सोनू रायसिख को गिरफ्तार किया है. पुलिस दोनों से फंडिंग और नेटवर्क से जुड़ी जानकारी जुटा रही है.
हॉस्टल में रहने वाले बच्चों की उम्र 6 से 17 साल के बीच बताई जा रही है. पुलिस को यहां से ईसाई धर्म से जुड़े कई धार्मिक ग्रंथ और किताबें भी मिली हैं. बच्चों ने भी पुलिस को बताया कि हॉस्टल में उन्हें ईसाई धर्म के बारे में पढ़ाया जाता था. वहीं, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया.
एसपी सुधीर चौधरी ने कहा कि जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक के खिलाफ पहले भी सीकर जिले में धर्मांतरण का मामला दर्ज हुआ था और वह फिलहाल जमानत पर था.
नया धर्मांतरण बिल क्या कहता है:-
-राजस्थान सरकार जल्द ही विधानसभा में नया धर्मांतरण बिल पास करने जा रही है.
-इसमें जबरन धर्मांतरण कराने पर 1 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है.
-इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है
-पीड़ित पक्ष की ओर से कोई भी रक्त संबंधी धर्म परिवर्तन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकता है.
-यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे 60 दिन पहले कलेक्टर ऑफिस में इसकी सूचना देनी होगी.






