Sunday, March 22, 2026
Uncategorized

खारिज हो गयी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के खिलाफ याचिका,1 लाख जुर्माना भी,जाहिल नेताओ ने 1300 करोड़ के काम को बता दिया था 13 हज़ार करोड़

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि सेंट्रल विस्टा पर देश को गलत जानकारियां दी गई हैं. पिछले कुछ महीनों से झूठे आरोप लगाए गए. फॉल्स नैरेटिव तैयार किए गए. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में झूठे आरोप लगाए गए और इसे वैनिटी प्रोजेक्ट कहा गया. इसकी जरूरत नहीं है. कुछ लोगों ने इसे 13 हजार 400 करोड़ में बनने वाला मोदी महल कहा. लेकिन मैं पूछता हूं कि ये आंकड़े कहां से आए? इसका जवाब वे दें.
2 प्रोजेक्ट पर चल रहा है काम, 1300 करोड़ लागत
केंद्रीय मंत्री ने इस प्रोजेक्ट के लागत पर चल रही चर्चाओं पर स्पष्टीकरण दिया. उन्होंने कहा कि इस समय सिर्फ दो प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. ये प्रोजेक्ट हैं नया संसद भवन और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू. हरदीप पुरी ने कहा कि नए संसद भवन की लागत 862 करोड़ और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू की लागत 477 करोड़ है. कुल मिलाकर ये लागत लगभग 1300 करोड़ रुपये है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि साल 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ नए संसद में मनाएंगे.
सेस्मिक जोन-2 में था पुराना संसद भवन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुराना संसद भवन भूकंप क्षेत्र सेस्मिक जोन-2 में था, भगवान न करें अगर कोई हादसा हो जाए तो इसका नतीजा क्या सकता है? लेकिन नई बिल्डिंग सेस्मिक जोन-4 में बनाई जा रही है. जहां खतरा कम है.

उन्होंने कहा कि संसद भवन 100 साल पहले बनाया गया था ये आज के लिए नहीं था. ये भारत पर शासन करने वाली एक सरकार ने निर्माण किया था. उन्होंने कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को छुआ नहीं जाएगा.
राजीव गांधी के समय से थी नए संसद की जरूरत
उन्होंने कहा कि जब से राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तभी से ही एक नए संसद भवन की जरूरत बताई जा रही थी, क्योंकि पुरानी बिल्डिंग मरम्मत के लायक नहीं रह गई है. उन्होंने कहा कि 2012 में इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक लेख भी लिखा था. जिसमें उन्होंने नए संसद की जरूरत बताई थी.
सेंट्रल विस्टा पर नहीं लगेगी रोक, HC ने याचिकाकर्ता पर ही लगाया एक लाख का जुर्माना
वैक्सीन के लिए है पर्याप्त पैसा
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि कुछ लोग वैक्सीन का मसला उठा रहे हैं, लेकिन हमारी सरकार ने वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. अगर इसके लिए और पैसे की जरूरत पड़ती है तो वो भी दिया जाएगा.
क्या मजदूरों को घर जाने को बोल दें?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि क्या हम काम बंद कर दें और वहां काम कर रहे वर्करों को घर जाने कह दें. क्या ऐसा करने के बाद जो ठेकेदार है वो वहां काम कर रहे सैकड़ों मजदूरों को पैसे देगा?
बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है और याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.

सेंट्रल विस्टा के निर्माण पर रोक क्यों नहीं? दिल्ली HC ने याचिका खारिज करते हुए बताई ये वजह

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि अभी सभी वर्कर निर्माण स्थल पर हैं और सभी कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है. इसलिए इस कोर्ट के पास कोई आधार नहीं है कि वो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मिले शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को रोक दे.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर रोक से HC का इनकार

‘अनुच्छेद 226 की शक्तियां इस्तेमाल करने का आधार नहीं’

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा पर उठाए सवाल, 1 लाख का जुर्माना

दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. सोमवार को अदालत में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट को अहम और राष्ट्रीय महत्व का बताया.
बता दें कि दिल्ली के लुटियंस जोन में बन रहे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में नया संसद भवन और नए आवासीय परिसर का निर्माण शामिल है. इस अवासीय परिसर में प्रधानमंत्री और उप राष्ट्रपति के आवास के साथ कई नए कार्यालय,  मंत्रालय के दफ्तर और केंद्रीय सचिवालय का निर्माण किया जाना है. इस प्रोजेक्ट की घोषणा सितंबर 2019 में की गई थी.
दिल्ली में जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो भी इस प्रोजेक्ट का काम जारी था. इसे लेकर सवाल उठने लगे कि आखिर कोरोना काल में इस प्रोजेक्ट को इजाजत कैसे दी जा सकती है. जब यहां 400 से 500 मजदूर काम कर रहे हैं.
याचिका में काम रोकने की थी मांग
इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए एक व्यक्ति ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ता ने कहा था कि अभी दिल्ली में कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज पर पूरी तरह रोक है,तो इस प्रोजेक्ट का काम क्यों नहीं रोका गया. याचिका में कहा गया था कि 500 से ऊपर मजदूर वहां काम कर रहे है इससे वहां कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है.
नवंबर 2021 तक पूरा करना है काम
अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट मुहर लगा चुका है. अदालत ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का ठेका सप्रूजी पलोंजी ग्रुप को मिला है और इसका काम नवंबर 2021 तक पूरा होना है, इसलिए इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य चलते रहना चाहिए.

याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह ने इस याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि ये याचिका  “मोटिवेटेड” है और ये ईमानदार पीआईएल नहीं (Not a genuine PIL) है.
राष्ट्रीय महत्व का है कार्य, नहीं रोका जा सकता है
याचिका द्वारा कोरोना संक्रमण फैलने का सवाल उठाने पर कोर्ट ने कहा कि सरकार पहले ही कह चुकी है कि वर्कर ‘साइट’ पर रहे हैं. और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए मुकम्मल इंतजाम किए गए हैं. इसलिए इस प्रोजेक्ट का काम अभी रोका नहीं जा सकता है. अदालत ने इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय महत्व का भी बताया और कहा कि इसे रोका नहीं जा सकता है.
अदालत ने कहा, “जिस दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के आदेश का जिक्र किया जा रहा है उसमें कहीं भी निर्माण कार्य रोकने की बात नहीं है. इस प्रोजेक्ट की वैधानिकता सुप्रीम कोर्ट में साबित हो चुकी है. इन्हें नवंबर 2021 तक काम पूरा करना है. इस ठेके में समय का बड़ा महत्व है, काम को हर हालत में पूरा करना है.”
बता दें कि 22 लाख वर्गफीट जमीन पर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का काम चल रहा है. इस परियोजना में 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. गौरतलब है कि दिल्ली में आज से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है इसलिए तहत फैक्ट्रियां और उद्योग कोरोना प्रोटोकॉल के साथ  खुल रहे हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि अभी सभी वर्कर निर्माण स्थल पर हैं और सभी कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है. इसलिए इस कोर्ट के पास कोई आधार नहीं है कि वो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मिले शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को रोक दे.

 

Leave a Reply