दिग्विजय सिंह गद्दार,साज़िश या खुद का रचा खेल,मार्केट से खत्म होती पहचान का,…बहुत तड़प तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के बाद से
कांग्रेस के एक वरिष्ठ अनुभवी नेता का कथन दिग्विजय सिंह के ये पुराने खेल है,जैसे ही मार्केट में कीमत खत्म होने लगती है हिन्दू आतंकवाद पर दिग्गी को अपने बोल भारी पड़ रहे हैं, कांग्रेस को कभी उम्मीद नही थी...









