ग्वालियर नगर निगम में 57 साल बाद ऐसा मौका आया जब मेयर पद BJP के हाथ से महापौर पद निकल गया. मेयर पद हारने के बाद अब बीजेपी अध्यक्ष पद नहीं गंवाना चाहती है. 66 पार्षदों की ग्वालियर नगर निगम में बीजेपी के 34 पार्षद जीतकर आए हैं. कांग्रेस सहित अन्य पार्षदों की संख्या 32 है. 5 अगस्त को नगर निगम के सभापति का चुनाव होना है. उधर कांग्रेस ने दावा किया है कि मेयर के बाद अब नगर निगम में सभापति भी कांग्रेस का होगा. BJP के कुछ पार्षद कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करेंगे. यही वजह है कि कांग्रेस के दावे के बाद BJP में हड़कंप मचा है. पार्टी अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी में लग गई. सभी पार्षदों को मंगलवार को बस में बैठकर दिल्ली भेज दिया गया.
ग्वालियर में 5 अगस्त को परिषद की पहली बैठक बुलाई गई है. इसी दिन नगर निगम ग्वालियर के सभापति का चुनाव होगा. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपना-अपना सभापति बनाना चाहती हैं लेकिन संख्याबल बीजेपी के पक्ष में दिखाई दे रहा है. वहीं कांग्रेस का दावा है कि उनका सभापति बनेगा. ऐसे में बीजेपी को चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है. यही वजह है कि पार्टी ने अपने सभी पार्षदों को दिल्ली भेजने का फैसला किया है.
दरअसल कांग्रेस के दावे से घबराई बीजेपी ने अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है. बीजेपी जिला अध्यक्ष कमल मखीजानी के नेतृत्व में भाजपा के सभी 34 पार्षद दिल्ली रवाना हो गए हैं. दिल्ली में पार्षद पार्टी के बड़े नेताओं ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा से मुलाकात करेंगे. इस दौरान सभापति चुनाव को लेकर रणनीति बन सकती है. 4 अगस्त की रात में ये पार्षद दिल्ली से वापस ग्वालियर लौटेंगे. इसके बाद 5 अगस्त को सभापति पद का चुनाव होना है. सभी पार्षद बस के जरिए दिल्ली रवाना हुए हैं.
जानिए ग्वालियर नगर निगम परिषद का गणित
ग्वालियर नगर निगम में 66 वार्ड हैं और यहां सभापति बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 34 पार्षदों का समर्थन चाहिए. नगर निगम चुनाव में बीजेपी के पूरे 34 पार्षद जीते हैं. वहीं कांग्रेस के 25 पार्षदों को जीत मिली. 3 निर्दलीय पार्षद कांग्रेस की सदस्यता ले चुके हैं और 4 और निर्दलीय पार्षद कांग्रेस के संपर्क में बताए जा रहे हैं. इस तरह कांग्रेस के कुल पार्षदों की संख्या 32 हो गई.
कांग्रेस की कोशिश है कि अब बीजेपी के किसी एक पार्षद को क्रॉस वोटिंग के लिए तैयार किया जाए. यदि ऐसा होता है तो दोनों दलों के पास 33-33 पार्षद हो जाएंगे और बराबर होने की स्थिति में मेयर को वोट डालने का अधिकार मिल जाएगा. इसका मतलब है कि सभापति पद पर भी कांग्रेस का कब्जा हो जाएगा. यही वजह है कि बीजेपी ने अब अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है.
गौरतलब है कि ग्वालियर नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की शोभा सिकरवार ने मेयर चुनाव में जीत हासिल की थी. खास बात ये है कि ग्वालियर नगर निगम में 57 साल से बीजेपी का मेयर बनता आ रहा था लेकिन इस बार इतिहास बदलते हुए कांग्रेस अपना मेयर बनाने में सफल रही.
बीजेपी के बागी नेताजी पार्षद बनने के बाद कांग्रेस में हुए शामिल
ग्वालियर में बीजेपी की हालत इतनी खराब है कि जो नेताजी बीजेपी से बागी हो गए उन्हें बीजेपी अपने खेमे में वापस नहीं ला सकी। उन नेताओं को कांग्रेस ने अपने खेमे में शामिल कर लिया। बीजेपी से बगावत करके वार्ड 33 से चुनाव जीतने वाली सुनीता अरुण कुशवाहा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
टिकट वितरण के समय बीजेपी से कर दी थी बगावत
बीजेपी नेता अरुण कुशवाहा ने बीजेपी पार्टी से पार्षद का टिकट मांगा था लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसी बात से नाराज होकर अरुण कुशवाहा ने पार्टी से बगावत कर दी और अपनी पत्नी सुनीता को वार्ड 33 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतार दिया। खास बात यह रही कि सुनीता चुनाव भी जीत गई। इस तरह बीजेपी से बगावत करके सुनीता अरुण कुशवाह वार्ड 33 से निर्दलीय पार्षद चुन ली गई।
बीजेपी अपने ही नेता को नहीं ला सकी पार्टी में वापस
बीजेपी भले ही जोड़-तोड़ की राजनीति करते हुए विपक्षी दलों के विधायकों और सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल करने का हुनर रखते हो, लेकिन उनकी ही पार्टी से बगावत करके पार्षद बनी सुनीता अरुण कुशवाहा को बीजेपी पार्टी वापस अपने खेमे में नहीं बुला सकी। इसका फायदा कांग्रेस ने उठाया और कांग्रेस ने सुनीता अरुण कुशवाहा को अपने खेमे में शामिल कर लिया।
विधायक सतीश सिंह सिकरवार के कार्यालय पर सुनीता अरुण कुशवाहा ने ली कांग्रेस की सदस्यता
कांग्रेस विधायक सतीश सिंह सिकरवार के कार्यालय पर मंगलवार को एक कार्यक्रम आयोजित करके सुनीता अरुण कुशवाहा ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली। विधायक सतीश सिंह सिकरवार की पत्नी और वर्तमान में ग्वालियर नगर निगम की नवनिर्वाचित महापौर शोभा सिकरवार ने सुनीता अरुण कुशवाहा को कांग्रेस की सदस्यता दिलवाई। इस तरह कांग्रेस के खेमे में एक पार्षद की बढ़ोतरी हो गई।
अपने पार्षदों को कांग्रेस में जाने से बचाने के लिए बीजेपी ने भेजा दिल्ली
ग्वालियर में कांग्रेस से बीजेपी इतनी डरी हुई है कि वह अपने पार्षदों को कांग्रेस से बचाने के लिए इधर-उधर लेकर भागती नजर आ रही है। मंगलवार को बीजेपी ने अपने सभी 34 विजई पार्षदों को एक बस में सवार करके दिल्ली के लिए रवाना कर दिया। बीजेपी को डर है कि कहीं उनके पार्षद उनके दल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल ना हो जाएं। ऐसा पहली बार हो रहा है जब बीजेपी कांग्रेस पार्टी के सामने इतनी कमजोर नजर आ रही है।






