Sunday, March 29, 2026
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पंजाब में रहस्य गहराया: अभी तक कोई पहचान नही बेअदबी में मारे गए शख्स की,सर्वे में कांग्रेस को बढ़त बेअदबी मुद्दे पर

अमृतसर दरबार साहिब (Amritsar Darbar Sahib) में हुई बेअदबी (Golden Temple Sacrilege Incident) की कोशिश में युवक की मौत के बाद उसकी शिनाख्त तो नहीं हो पाई है लेकिन इस बात का खुलासा हो गया है कि यह युवक प्लानिंग के साथ घटना को अंजाम देने के लिए वहां पहुंचा था. पुलिस के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सीसीटीवी की फुटेज (CCTV footage) के मुताबिक शनिवार को इस युवक दरबार साहिब में तीन बार एंट्री की थी. बेअदबी की घटना को अंजाम देने के लिए तीन प्रयास किए और वह तीसरे प्रयास में रेलिंग पार करने में कामयाब रहा.
शनिवार को सुबह 8 बजकर 33 मिनट पर जलियांवाला बाग (Jallianwala Bagh) के रास्ते शनि मंदिर होते हुए दरबार साहिब में दाखिल हुआ था. युवक दरबार साहिब में परिक्रमा के पास सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर नजर आया था. पुलिस की जानकारी के मुताबिक 11 बजे एंट्री के बाद घटना को अंजाम देने के लिए यह शख्स घंटों तक परिसर में ही रहा. इस घटना को अंजाम देने से पहले यह युवक लगंर हाल के कैमरों में भी कैद हुआ.

दो बार पहले ही कर चुका था कोशिश
दो बार बेअदबी (Guru Granth Sahib Sacrilege Incident) की घटना को अंजाम देने में असफल रहने के बाद वह शाम को दरबार साहिब की परिक्रमा के पास शाम 5 बजकर 45 मिनट पर पहुंचा. उस समय वहां पाठ चल रहा था और मौका पाकर यह युवक रेलिंग फांद कर अंदर जा पहुंचा।

अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (Golden Temple in Amritsar)में शनिवार शाम कथित तौर पर बेअदबी का प्रयास (sacrilege attempt In Golden Temple  ) करने के मामले में विशेष जांच दल का गठन किया गया है. ये जांच दल पंजाब सरकार को दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. स्वर्ण मंदिर में बेअबदबी करने के आरोप में शनिवार को उत्तर प्रदेश के व्यक्ति की गुस्साई भीड़ ने पिटाई कर दी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई. यह घटना उस समय हुई जब वह व्यक्ति पवित्र स्थल पर सुनहरी ग्रिल फांदकर तलवार उठाने के बाद उस स्थान के पास पहुंच गया जहां सिख ग्रंथी पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ कर रहा था. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) कार्यबल के सदस्यों ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया. जब उसे एसजीपीसी कार्यालय ले जाया जा रहा था तब गुस्साई भीड़ ने उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई.

इस मामले पर पंजाब के डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. ऐसा लगता है कि वह व्यक्ति इसी लक्ष्य के साथ आया था क्योंकि वह वहां 9-10 घंटे था. उसकी अभी शिनाख्त नहीं हो पाई है. उप मुख्यमंत्री ने रविवारक को कहा कि इस पूरी घटना की जांच के लिए डीसीपी लॉ एंड ऑर्डर के तहत एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है. उन्होंने बताया कि यह विशेष जांच दल दो दिन के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करेगी.

 

अमृतसर के दरबार साहिब में बेअदबी की कोशिश (Sacrilege in Amritsar Darbar Sahib) में मारे गए युवक की पहचान करना पंजाब पुलिस (Punjab Police) के लिए चुनौती बन गया है. मृतक युवक के बायोमेट्रिक (Biometric) से फिंगर प्रिंट (Finger Prints) भी मैच नहीं हुए हैं. जिससे उसका कोई आधार कार्ड (Aadhar Card) भी ट्रेस नहीं हुआ है. पुलिस फोरेंसिक टीम (Forensic Team) भी युवक की पहचान करने में नाकामयाब रही है.

दूसरी ओर, कपूरथला के निजामपुर गुरुद्वारा में बेअदबी की कोशिश में मारे गए युवक के बारे में बिहार की राजधानी पटना की एक महिला ने दावा किया है कि मृतक उसका भाई है. इस महिला ने कपूरथला पुलिस से भी संपर्क किया है. महिला के मुताबिक युवक का नाम अंकित है. महिला ने अपनी बात को साबित करने के लिए कपूरथला पुलिस को कुछ दस्तावेज भी भेजे हैं. कपूरथला पुलिस ने News18 के संवाददाता से इस बात की पुष्टि की है और कहा है कि इसके दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं.
पंजाब में फिर हो सकती है बेअदबी की घटना, आईबी का अलर्ट
इसी बीच देश की खुफिया एजेंसी आईबी (Intelligence Agency IB) ने पंजाब में फिर से बेअदबी की घटनाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है. खुफिया एजेंसियों के अलर्ट के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी पंजाब सरकार को राज्य के सभी धार्मिक स्थलों की मुस्तैदी से निगरानी करने के आदेश दिए हैं. मंत्रालय ने कहा कि देश विरोधी तत्व पंजाब में माहौल खराब करने की फिराक में हैं. इसलिए सभी धार्मिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था तेजी से की जाए. खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के मुताबिक पंजाब के डेरे और गुरुद्वारे देश विरोधी ताकतों के निशाने पर हैं. इसलिए खासकर इन स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाए जाने की जरूरत है.

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अचानक सिख धर्म से जुड़े बेअदबी की कोशिश की दो घटनाओं ने पंजाब को झकझोर कर रख दिया है. 18 दिसंबर को अमृतसर के हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में बेअदबी की कोशिश फिर कुछ घंटों बाद 19 दिसंबर को कपूरथला के निजामपुरा के एक गुरुद्वारे में निशान साहिब को कथित तौर पर अपवित्र करने के आरोप में एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या।
इन दोनों घटनाओं के बाद एक बार फिर जहां बेअदबी को लेकर सिखों में गुस्सा है, तो दूसरी तरफ भीड़तंत्र को लेकर सवाल… लेकिन यह पहली बार नहीं है जब सिख धर्म से जुड़ी पवित्र पुस्तक की बेअदबी का मामला सामने आया है और न ही इसके आरोप में पहली बार किसी की हत्या हुई है.

सबसे पहला सवाल है कि आखिर बेअदबी है क्या?

दरअसल, बेअदबी का मतलब होता है अपमान करना… बेदबी सिखों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि सिख धर्म के मुताबिक, गुरु ग्रंथ साहिब सिर्फ एक पवित्र ग्रंथ नहीं हैं, सिखों के लिए, इसे एक जीवित गुरु माना जाता है. इसलिए गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का कोई भी मामला एक जीवित गुरु पर हमला करने के बराबर है.

इसलिए गुरु ग्रंथ साहिब के अलावा, ‘गुरुद्वारा’, जिसका शाब्दिक अर्थ गुरु का निवास होता है और गुरु की सेवा में उपयोग की जाने वाली सभी वस्तुएं पवित्र मानी जाती हैं. सिखों द्वारा पहनी जाने वाली ‘पगड़ी’, ‘कृपाण’ को भी पवित्र माना जाता है. सिखों द्वारा रखे गए बढ़ा कर बाल (केश) और दाढ़ी भी पवित्र माने जाते हैं और इन्हें जबरन छूना या उनका अनादर करना भी बेअदबी है.

इससे पहले बेअदबी मामला किसान आंदोलन के दौरान सामने आया था… दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन चल रहा था, इसी दौरान 15 अक्टूबर को तरन तारन के रहने वाले लखबीर सिंह की कथित तौर पर निहंग सिखों के एक समूह ने हत्या कर दी. उस वक्त निहंगों ने दावा किया था कि लखबीर को उनके पवित्र ग्रंथ – सरबलोह ग्रंथ का ‘अपमान’ करने के लिए ‘दंड’ दिया गया है. निहंगों ने लखबीर के हाथ काट दिए थे और उसे पुलिस के बैरिकेड पर लटका दिया था.

इस मामले में कई निहंगों ने अपना गुनाह कबूल किया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.

आजादी के बाद साल 1951 में, तत्कालीन निरंकारी प्रमुख सतगुरु अवतार सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब की मौजूदगी में खुद को एक जीवित गुरु घोषित कर दिया था. उनके उत्तराधिकारी, गुरबचन सिंह ने सिख परंपराओं में बदलाव करने और उन्हें अपने संप्रदाय में अपनाए जाने की कोशिश की.
पत्रकार जगतार सिंह कहते हैं, “रूढ़िवादी सिखों द्वारा निरंकारी को विधर्मी माना जाता था, क्योंकि उन्होंने अपने संस्थापकों और अपने उत्तराधिकारियों को गुरु के रूप में सम्मान देना शुरू कर दिया था.” कहा जाता है कि निरंकारी के तत्कालीन नेता गुरबचन सिंह ने भी अपनी तुलना गुरु गोबिंद सिंह से की थी और कहा था कि वह सिख धर्म के ‘पंज प्यारे’ की तारीफ करने के लिए ‘सत सितारे’ बनाएंगे. इन मान्यताओं को सिखों के बीच बेअदबी माना जाता है.

निरंकारी के तत्कालीन नेता गुरबचन सिंह के इन फैसलों का सिखों ने अहिंसक विरोध किया, इसी दौरान पुलिस और सशस्त्र निरंकारी ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया, जिसमें 13 सिख मारे गए थे. इस मामले में 62 निरंकारी को आरोपित किया गया था, जिस पर हरियाणा में मुकदमा चलाया गया था. लेकिन सभी को आत्मरक्षा में हमला करने के आधार पर बरी कर दिया गया.

इसके बाद जालंधर जिले के नकोदर शहर में 1986 में एक बड़ी बेअदबी की घटना हुई, जब गुरु ग्रंथ साहिब की पांच प्रतियां जला दी गईं. जब सिखों ने बेअदबी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और जली हुई प्रतियों को बरामद करने की मांग की, लेकिन इसी दौरान पुलिस ने उन पर गोली चला दी. पुलिस फायरिंग में चार सिखों की मौत हो गई.
इसके अलावा ऑपरेशन ब्लू स्टार, जिसके तहत साल 1984 में सेना ने अमृतसर स्थित सिखों के सबसे पवित्र आराधना स्थल स्वर्ण मंदिर या दरबार साहिब में प्रवेश किया था, इसे भी सिख बेअदबी की घटना मानते हैं.
साल 2007 में, डेरा सच्चा सौदा संप्रदाय के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह की तरह पोशाक पहन ली थी, जिसकी वजह से सिखों और डेरा अनुयायियों के बीच तेज टकराव हुआ था. इसे भी बेअदबी का मामला माना जाता है.
अब आते हैं साल 2015 पर… 2015 में बेअदबी के जिन मामलों ने पंजाब में राजनीतिक तूफान खड़ा किया, उनमें असल में तीन अलग-अलग मामले शामिल हैं.

पहली घटना 1 जून को हुई थी जिसमें फरीदकोट जिले के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव से गुरु ग्रंथ साहिब की एक प्रति चोरी हो गई थी.

दूसरी घटना 24-25 सितंबर की है, जिसमें बुर्ज जवाहर सिंह वाला और बरगारी में गाली-गलौज करने वाले पोस्टर सामने आए, जिसमें धमकी दी गई थी कि गुरु ग्रंथ साहिब को सड़कों पर फेंक दिया जाएगा. इस मामले में कहा जाता है कि यह डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की करतूत थी, क्योंकि पंथ के संस्थापक गुरमीत राम रहीम सिंह की फिल्म ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को पंजाब में रिलीज नहीं होने दिया गया था.

तीसरी घटना 12 अक्टूबर 2015 की है जब फरीदकोट जिले के बरगारी गांव की ओर जाने वाली सड़कों पर गुरु ग्रंथ साहिब के फटे पन्ने मिले थे, जिसके बाद सिखों ने बेअदबी का विरोध किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान बहबल कलां और कोटकपुरा में पुलिस ने गोली चलाई, पुलिस फायरिंग में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी.

बेअदबी और पुलिस फायरिंग के कारण हुई मौतों के खिलाफ गुस्सा एक प्रमुख कारण था कि 2017 के विधानसभा चुनावों में शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा।
इन मामलों में सीबीआई जांच हुई लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. तत्कालीन अकाली सरकार ने अक्टूबर 2015 में बेअदबी के मामले सीबीआई को सौंपे थे, लेकिन जुलाई, 2019 को सीबीआई, ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. मुख्य संदिग्धों में से एक, मोहिंदरपाल बिट्टू सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट से पहले जून 2019 में नाभा जेल में मारा गया. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद, सीबीआई ने इस साल की शुरुआत में पंजाब पुलिस को बेअदबी की घटनाओं से जुड़ी फाइलें सौंप दीं.

 

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