Friday, February 27, 2026
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मियां सलमान खुर्शीद और बेगम लुइस खुर्शीद को,क्यों कहते हैं बैसाखी चोर मियां बीवी

21 जुलाई 2021 की रिपोर्ट

केंद्रीय अनुदान में हासिल 71 लाख रुपये से ज्यादा की हेराफेरी के मामले में एक मुकामी अदालत ने साबिक मरकजी वजीर और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की बेगम लुईस खुर्शीद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है. डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट लुईस खुर्शीद के जरिए संचालित किया जाता है. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रवीण कुमार त्यागी ने मंगल को लुईस खुर्शीद और ट्रस्ट के सचिव अतहर फारूकी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए मामले की सुनवाई की अगली तारीख 16 अगस्त तय की है. लुईस खुर्शीद ट्रस्ट की प्रोजेक्ट डायरेक्टर थीं. आर्थिक अपराध शाखा ने जांच शुरू की थी और जून 2017 में और ईओडब्ल्यू निरीक्षक राम शंकर यादव ने यहां कायमगंज पुलिस स्टेशन में लुईस खुर्शीद और फारूकी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की. इस मामले में चार्जशीट 30 दिसंबर 2019 को दाखिल की गई थी.
खुर्शीद परिवार ने इन इल्जामों से इनकार किया है
मार्च 2010 में, ट्रस्ट को उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में विकलांग व्यक्तियों के बीच व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल और सुनने में मदद करने वाले यंत्र के वितरण के लिए मरकजी सरकार से 71.50 लाख रुपये का अनुदान मिला था. बाद में, 2012 में ट्रस्ट के ओहदेदारान के खिलाफ बदउनवानी और जालसाजी के इल्जाम लगाए गए, जब खुर्शीद तत्कालीन यूपीए सरकार में मंत्री थे. हालांकि खुर्शीद परिवार ने इन इल्जामों से इनकार किया है

उत्तर प्रदेश › दिव्यांग उपकरण घोटाला : सलमान खुर्शीद की पत्नी को नहीं मिली अंतरिम जमानत

दिव्यांग उपकरण घोटाला : सलमान खुर्शीद की पत्नी को नहीं मिली अंतरिम जमानत

Tue, 01 Oct 2019 09:19 PM

71 लाख के दिव्यांग उपकरण घोटाले में फंसी पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद को अदालत से राहत नहीं मिली। प्रभारी जिला जज शकील अहमद खां की अदालत ने सुनवाई के बाद लुईस खुर्शीद और अख्तर फारूखी उर्फ मोहम्मद अतहर को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। दोनों की अग्रिम जमानत के लिए दी गई अर्जी पर चार अक्तूबर को सुनवाई होगी।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 30 मार्च 2010 को प्रदेश के कई जिलों में दिव्यांगों को नि:शुल्क उपकरण बांटने के लिए कायमगंज की पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद की देखरेख में संचालित डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट फर्रुखाबाद को 71 लाख का अनुदान दिया था। मंत्रालय ने प्रत्येक जिले में कैंप लगाकर दिव्यांगों को नि:शुल्क उपकरण वितरित करने के निर्देश दिए थे। कैंप लगाने के बाद ट्रस्ट को टेस्ट चेक रिपोर्ट भी सौंपनी थी। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने 15 अक्तूबर 2010 को भोजीपुरा क्षेत्र में कैंप लगाकर 21 दिव्यागों को उपकरण वितरित करने की टेस्ट चेक रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी थी। रिपोर्ट में तत्कालीन जिला विकलांग कल्याण अधिकारी, बरेली और खंड विकास अधिकारी भोजीपुरा के हस्ताक्षर व मुहर थी।
मंत्रालय ने जांच कराई तो खुलासा हुआ कि भोजीपुरा क्षेत्र में ट्रस्ट ने कोई कैंप लगाया ही नहीं था। जांच में दोनों अफसरों के हस्ताक्षर और मुहर फर्जी पाए गए। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन के निरीक्षक रामशंकर यादव ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ 29 मई 2017 को थाना भोजीपुरा में धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। यह घोटाला खुलने पर फतेहगढ़, सिद्धार्थनगर, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, एटा और बरेली में भी एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

भोजीपुरा के मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है। जांच एजेंसी ने इस मामले में लुईस खुर्शीद और ट्रस्ट के पदाधिकारी अख्तर फारूखी को भी आरोपी बनाया है। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं ने लुईस खुर्शीद और अख्तर फारूखी की ओर से अग्रिम जमानत के लिए जिला जज बरेली की अदालत में अर्जियां दी थीं। अंतरिम जमानत की भी अर्जी दी गई थी। अदालत ने दोनों की अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर दी

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