भारी भृष्टाचार की खबर….
बीते शनिवार सुबह राजधानी लखनऊ से लेकर यूपी के कई जिलों में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) के करीबी नेताओं के घर आयकर विभाग (Income tax department) की छापेमारी हुई थी, जिसके बाद रविवार को अखिलेश यादव के साथ प्रेसवार्ता (press confrence) करते हुए सपा के राष्ट्रीय सचिव ने दावा किया कि उनके घर से 17 हजार रुपए के अलावा कुछ नहीं मिला। इसी बीच आयकर विभाग ने सपा प्रवक्ता व राष्ट्रीय सचिव के दावों को खारिज करते हुए छापेमारी से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जांच में करोड़ों के कर चोरी के प्रमाण मिले हैं। इस दौरान 14 निजी व सार्वजनिक बैंकों में दो दर्जन से ज्यादा लॉकरों को सीज किया गया। प्रारंभिक जांच में सपा नेता के बेंगलुरु में संचालित स्कूल और कॉलेजों में डोनेशन के माध्यम से करोड़ों का हेरफेर के सबूत मिले हैं। इसे कई शहरों में रियल एस्टेट में निवेश किया गया है। पूर्वांचल के शहरों के साथ लखनऊ में भी करोड़ों रुपये की संपत्तियों के कागजात मिले हैं। ये परिवार की महिलाओं व परिजनों के नाम से हैं।
अधिकारियों की पूछताछ में सपा नेता ने बताया कि उन्होंने कई कंपनियों में करोड़ों की फंडिंग की है। लेकिन उनका नाम कागजों में नहीं है। जबकि उस कंपनी के लाभ में उन्होंने 50 फीसदी तक हिस्सा तय किया हुआ है। जांच बेंगलुरु से उप निदेशक जांच एम जैन के अलावा बनारस से जेपी चौबे, राकेश कुमार श्रीवास्तव, गोपीनाथ चौबे शामिल रहे।
15 घंटे तक चली इनकम टैक्स की छापेमारी
आपको बता दें कि सपा के राष्ट्रीय सचिव व प्रवक्ता राजीव राय के कैंप कार्यालय पर शनिवार सुबह सात बजे से शुरू हुई आईटी विभाग की छापेमारी देर रात पौने 12 बजे तक चलती रही। सुबह छापेमारी की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। इस दौरान अधिकारियों पर फंसाने का आरोप लगाते हुए अधिकारियों के लैपटॉप भी कार्यकर्ताओं ने चेक किए।
शनिवार सुबह नौ वाहनों से दो दर्जन से अधिक अधिकारी शहर कोतवाली क्षेत्र में पुरानी तहसील के पास राजीव राय के कैंप कार्यालय पहुंचे। अंदर घुसने के बाद टीम के सदस्यों ने राजीव राय से पूछताछ शुरू की। टीम के सदस्यों ने राय के कंप्यूटर का हार्ड डिस्क कब्जे में ले लिया। उनके मोबाइल का क्लोन भी लिये जाने के बात सामने आ रही है।
राजीव राय ने किया महज 17 हजार रुपए मिलने का दावा
इनकम टैक्स विभाग के छापेमारी के बाद समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजीव राय ने दावा किया है कि 15 घंटे तक की छानबीन करने के बाद टीम को उनके घर से महज 17 हजार रुपये ही मिले। राजीव राय ने आरोप लगाया है कि आयकर डिप्टी कमिश्नर नेता के वेश में मेरे बेडरूम में घुस आए। टीम ने मेरा फिजियोथेरेपी करने वाले डॉक्टर को भी टारगेट किया। राजीव ने कहा कि मुझसे पूछना था तो मेरे परिवार को पूरा दिन बंधक क्यों बनाकर रखा गया।
राजीव ने आगे कहा कि मेरा दुर्भाग्य ये है कि मैं उस जाती से हूं जिसे मुख्यमंत्री पसंद नहीं करते। राजीव ने कोरोना काल के दौरान किए मदद गिनाया है। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान मैंने अन्नपूर्णा संस्था बनाकर सभी की मदद की। मलेशिया में बच्चे फंसे हुए थे उनकी मदद की।
जानें कौन हैं अखिलेश के करीबी राजीव राय,
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव के करीबी सपा नेताओं पर आयकर विभाग की छापेमारी हुई है. इनकम टैक्स टीम के सबसे ज्यादा निशाने पर सपा के राष्ट्रीय सचिव व प्रवक्ता राजीव राय रहे हैं, जिनके घर मऊ, लखनऊ से लेकर बंगलुरु तक छापे पड़े हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन हैं राजीव राय जो केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर हैं?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले राजीव राय पूर्वांचल के जिला बलिया के सोहांव ब्लाक के गांव सुरही के रहने वाले हैं, लेकिन राजनीतिक जमीन उन्होंने मऊ में तैयार की है. राजीव राय दो भाइयों में सबसे बड़े हैं. प्राथमिक शिक्षा गांव में हुई है. गवर्नमेंट स्कूल बलिया से इंटर पास करने के बाद राजीव राय ने बीएचयू वाराणसी से ग्रेजुएशन किया.
राजीव राय 1990 में फिजियोथिरेपी का कोर्स करने बेंगलुरु चले गए. पढ़ाई के दौरान दक्षिण भारत ऐसा रास आया कि उन्होंने वहीं पर अपना कारोबार शुरू कर दिया. बेंगलुरु में 11 कॉलेज स्थापित किए, जिसमें इंजीनियरिंग से लेकर मैनेजमेंट और फार्मेसी कॉलेज शामिल हैं. राजीव राय कर्नाटक के आरवीके ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूशंस के चेयरमैन हैं. इतना ही नहीं वह दुबई में भी एक मेडिकल कॉलेज चलाते हैं.
अखिलेश मैसूर पढ़ने गए तो दोस्ती परवान चढ़ी
कर्नाटक के लिंक से ही राजीव राय सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीब आए हैं. अखिलेश मैसूर में पढ़ने गए तो राजीव राय की दोस्ती परवान चढ़ी. इसके बाद 2012 चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने जब मायावती सरकार के खिलाफ सूबे के दौरा शुरू किया तो राजीव राय उनके राजनीतिक सलाहकारों में शामिल रहे. इसके चलते उन्हें साल 2012 में प्रदेश में सपा सरकार के मुख्य शिल्पकारों में एक समझा जाता है.
हालांकि, 2012 में सपा सरकार बनने के बाद राजीव राय को अखिलेश ने पार्टी से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया था, लेकिन फिर उनकी एंट्री हो गई थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मऊ सीट से सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ाया गया था. राजीव राय जीत नहीं सके और तीसरे स्थान पर रहे थे. लेकिन सपा में उनकी पकड़ वैसे ही बनी रही है और 2016 में शिवपाल यादव से जब अखिलेश के छत्तीस के आंकड़े हुए तो राजीव राय अखिलेश के साथ थे.





