Sunday, March 29, 2026
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अडानी का धोखा या अडानी के साथ धोखा,रिपोर्ट फर्जी, कानूनी कार्यवाही की तैयारी में अडानी

अडानी समूह ने गुरुवार को कहा कि वह अपनी प्रमुख कंपनी के शेयर बिक्री को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के तहत ‘बिना सोचे-विचारे’ काम करने के लिये हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ ‘दंडात्मक कार्रवाई’ को लेकर कानूनी विकल्पों पर गौर कर रहा है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में उद्योगपति गौतम अडाणी की अगुवाई वाले समूह पर ‘खुल्लम-खुल्ला शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल होने के आरोप के एक एक दिन बाद समूह ने यह बात कही है। कंपनी के इस आरोप से विविध कारोबार से जुड़े समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।

समूह के विधि मामलों के प्रमुख जतिन जलुंधवाला ने कहा, ”हिंडनबर्ग रिसर्च ने गलत इरादे से बिना कोई शोध और पूरी जानकारी के समूह के खिलाफ 24 जनवरी, 2023 को रिपोर्ट प्रकाशित की। इससे अडाणी समूह, हमारे शेयरधारकों और निवेशकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। भारतीय शेयर बाजार में रिपोर्ट के जरिये जो उतार-चढ़ाव आया, वह काफी चिंता की बात है…।” उन्होंने कहा कि रिपोर्ट और उसकी निराधार बातें कुछ और नहीं बल्कि अडाणी समूह की कंपनियों के शेयरों की कीमतों को नुकसान पहुंचाने के लिये तैयार की गयी थीं।

जलुंधवाला ने कहा, ”एक विदेशी इकाई ने जानबूझकर और बिना सोचे-विचारे निवेशक समुदाय और आम लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया है। उसने अडाणी समूह, उसके नेतृत्व की साख को बट्टा लगाने के साथ हमारी प्रमुख कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज के एफपीओ (अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम) की बिक्री को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। हम उसकी इन हरकतों से काफी परेशान हैं।”

 

बीते बुधवार अडानी ग्रुप के शेयर धड़ाम से गिर पड़े। इसकी वजह अमेरिका की शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) को बताया गया। हिंडनबर्ग रिसर्च ने ऐलान किया कि वह अडानी ग्रुप से जुड़ी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को बेच रहा है। हिंडनबर्ग की अडानी ग्रुप में मौजूदगी यूएस-ट्रेड बॉन्ड्स के जरिये है। इसके साथ ही हिंडनबर्ग रिसर्च ने रिपोर्ट भी जारी किया है जिसमें अडानी ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस निगेटिव रिपोर्ट की वजह से अडानी ग्रुप की कंपनियों तगड़ा नुकसान हुआ और महज एक दिन में एशिया के सबसे धनी शख्स गौतम अडानी को 45 हजार करोड़ रुपये का झटका लगा। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स की रिपोर्ट के अनुसार इससे अडानी की संपत्ति घटकर 113 अरब डॉलर रह गई और वह सबसे रईस लोगों की सूची में चौथे नंबर पर खिसक गए हैं।

अडानी ग्रुप पर लगे कई गंभीर आरोप

अडानी ग्रुप पर लगे कई गंभीर आरोप

 

शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने बुधवार को जारी इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें कहा गया है कि अडानी ग्रुप अपनी उन स्कीमों को प्रमोट करके शेयर मार्केट को कंट्रोल कर रही थी जो फ्राड हैं। इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप की कंपनियों को 85 फीसदी से ज्यादा ओवरवैल्यूड भी बताया गया है। ये कंपनियां कर्जे में डूबी हुई हैं और उनकी वजह से ग्रुप पर संकट है। इसके साथ ही ये कहा गया है कि अडानी ग्रुप की कंपनियां कई वर्षों से स्टॉक हेरफेर में गड़बड़ी कर रही हैं। उम्मीद के मुताबिक अडानी ग्रुप ने इस रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा बताया है और लगाए गए सभी आरोपों को नकार दिया है। कंपनी ने कहा है कि यह उसे बदनाम करने की साजिश है।

अडानी ग्रुप को हुआ करोड़ों का नुकसान

अडानी ग्रुप को हुआ करोड़ों का नुकसान

अब इसके पीछे का सच क्या है यह पता चलना बाकी है लेकिन महज इन आरोपों की वजह से कंपनी की क्रेडिट पर गंभीर असर पड़ा है और अडानी ग्रुप को अच्छा-खासा नुकसान उठाना पड़ा है। इस बीच जैसे ही हिंडनबर्ग रिसर्च से अडानी की कंपनी को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ लोग ये पता करने में जुट गए हैं कि आखिर ये कौन सी फर्म है और इसे चलाने वाले लोग कौन हैं? हिंडनबर्ग का दावा है कि वो दशकों से इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी में काम कर रही है और उसका कॉर्पोरेट गलत कामों को खोजने और कंपनियों के खिलाफ दांव लगाने का ट्रैक-रिकॉर्ड है।

हिंडनबर्ग रिसर्च का काम क्या है?

हिंडनबर्ग रिसर्च की स्थापना साल 2017 में नाथन एंडरसन के द्वारा की गई थी। अपने दावे के मुताबिक ये एक फोरेंसिंक फाइनेंसियल रिसर्च फर्म है जो जो इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवेटिव का विश्लेषण करती है। आपको बता दें कि डेरिवेटिव संपत्ति खरीदने या बेचने के लिए दो या दो से अधिक संस्थाओं के बीच हुआ समझौता है। इसको एक कांट्रैक्ट कहा जाता है। अपनी वेबसाइट पर हिंडनबर्ग ने लिखा है कि उसकी नजर मानव निर्मित वित्तीय आपदाओं पर रहती है। इन आपदाओं में अकाउंटिंग में गड़बड़ी, कुप्रबंधन और अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस शामिल हैं। यह प्रॉफिट कमाने के लिए टारगेट कंपनी के खिलाफ बेट लगाती है।

हिंडनबर्ग रिसर्च नाम के पीछे की कहानी

हिंडनबर्ग रिसर्च नाम के पीछे की कहानी

 

हिंडनबर्ग रिसर्च ने अब तक कई कंपनियों का पर्दाफाश किया है। इसका नाम 1937 में हुए एक हाई प्रोफाइल हिंडनबर्ग एयरशिप हादसे के नाम पर रखा गया है। ओवरलोडिंग की वजह से विमान में आग लग गई थी जिसमें 35 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बेहद चर्चित होने की वजह ये भी थी कि इसमें मारे गए कई लोग किंग जॉर्ज VI और क्वीन एलिजाबेथ के राज्याभिषेक में शामिल होने जा रहे थे। हिंडनबर्ग रिसर्च का ये मानना है कि ये हादसा टाला भी जा सकता था, क्योंकि हाईड्रोजन के गुब्बारों में पहले भी हादसे हो चुके थे। कंपनी का कहना है कि हम हिंडनबर्ग हादसे की तर्ज पर शेयर मार्केट में हो रहे गोलमाल पर नजर रखते हैं। हमारा ध्येय उन्हें लोगों के सामने लाना होता है।

नाथन एंडरसन कौन हैं?

इजरायल के निवासी नाथन एंडरसन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टीकट से इंटरनेशनल बिजनस में डिग्री हासिल किया हुआ है। इसके साथ ही वे एक डेटा कंपनी फैक्टसेट रिसर्च सिस्टम्स इंक में काम कर चुके हैं। इस कंपनी में काम के दौरान उन्होंने निवेश मैनेजमेंट कंपनियों के साथ काम किया। इस दौरान वे वाशिंगटन डीसी और न्यूयार्क की ब्रोकर डीलर्स फर्मों के साथ जुड़े रहे। कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अपने खर्च चलाने के लिए कि नाथन एंडरसन येरूशलम में एंबुलेंस ड्राइवर का काम भी कर चुके हैं।

मार्कोपोलोस के गुरू मानते हैं एंडरसन

हिंडनबर्ग रिसर्च को लांच करने से पहले एंडरसन, हैरी मार्कोपोलोस के साथ काम कर रहे थे। हैरी मार्कोपोलोस सेक में अधिकारी रह चुके हैं।जैसे भारत में सेबी होती है वैसे ही अमेरिका में सेक होता है। हैरी मार्कोपोलोस बर्नी मेडॉफ की फ्रॉड स्कीम का पर्दाफाश कर खूब चर्चा में आए थे। नाथन एंडरसन, हैरी मार्कोपोलोस को अपना गुरू मानते हैं। गुरू अपने चेले से खूब प्रभावित हैं। मार्कोपोलोस कहते हैं कि एंडरसन कुछ भी खोद कर निकाल सकते हैं। अगर उन्हें किसी भी घपले की भनक लग जाए तो वो उसे बेपर्दा करके ही दम लेते हैं।

36 कंपनियों का कर चुके हैं भंडाफोड़

हिंडनबर्ग ने सितंबर 2020 में इलेक्ट्रिक ट्रक निर्माता निकोला कॉर्प की एक स्कीम का पर्दाफाश किया था। निकोला अपने टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट के बारे में निवशकों को धोखा दे रही थी जिसका खुलासा हिंडनबर्ग रिसर्च ने किया था। निकोला ने एक वीडियो में दिखाया था कि उसका इलेक्ट्रिक ट्रक पूरी रफ्तार के साथ पहाड़ी पर चढ़ गया है लेकिन कंपनी ने यह नहीं दिखाया कि वह पहाड़ी से कुछ देर के बाद लुढ़क गया था। इस खुलासे के बाद अदालत ने निकोला के संस्थापक ट्रेवर मिल्टन को निवेशकों से झूठ बोलने के आरोप में धोखाधड़ी का दोषी पाया था और भारी भरकम जुर्माना भी लगाया था। हिंडनबर्ग बीते 6 सालों में अब तक कम से कम 36 कंपनियों में गड़बड़ी का भंडाफोड़ कर चुकी है।

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