23 दिनों तक किया सामूहिक दुष्कर्म, अब पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे गुजरेगी, रूह कंपा देगी वारदात
जमुई में पोक्सो कोर्ट की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. तीन दोषियों को उम्रकैद सुनाया गया है. पढ़ें खबर
जमुई : बिहार में मंगलवार का दिन काफी अहम रहा. जमुई पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. सामूहिक दुष्कर्म के तीन दरिंदों को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.
जिन तीन को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई गई है, उसमें मोहम्मद इमरान उर्फ चांद, मोहम्मद आफताब अंसारी और मोहम्मद सद्दाम शामिल हैं. इसके साथ ही तीनों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. 2 महीने में केस का स्पीडी ट्रायल चलाकर फैसला सुनाया गया.
पोक्सो कोर्ट की विशेष अदालत ने दोनों पक्षों के बहस और गवाहों के बयान सुनने के बाद 37 पेज के फैसले में तीनों को सजा सुनाई. सरकार की ओर से विशेष लोक लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने तीनों को घृणित और नारकीय अपराध करने के लिए मृत्यु दंड की मांग की थी. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार और सत्यजीत कुमार ने बहस की.
क्या है पूरा मामला? : एक दिसंबर 2025 को जमुई के अलीगंज बाजार से 15 वर्षीय नाबालिग गायब हुई. जब 24 दिसंबर 2025 को, जमुई पुलिस ने कटिहार के एक बंद कमरे से बरामद कर उसे कोर्ट में बयान के लिए प्रस्तुत किया तो उसकी मानसिक शारीरिक स्थिति देखकर सभी कांप उठे. नाबालिग ने बताया कि लगातार 23 दिन तक एक बंद कमरे में उसे रखकर दुष्कर्म जारी रहा.
अपने बयान में नाबालिग ने पुलिस और बाद में कोर्ट में गवाही के दौरान कहा कि उसे अलीगंज से अपहरण कर मोहम्मद इमरान उर्फ चांद कटिहार ले गया. जहां मूर्छित अवस्था में कटिहार के रहने वाले मोहम्मद इमरान आलम उर्फ चांद तथा मोहम्मद आफताब अंसारी ने एक होटल में लगातार दुष्कर्म किया. फिर उसने अपने एक दोस्त मोहम्मद सद्दाम को नाबालिग लड़की को सौंप दिया.
इधर नाबालिग की मां नाबालिग को खोजकर निराश हो चुकी थी. तभी उसके मोबाइल पर अचानक एक कॉल आया. फोन करने वाले शख्स ने कहा कि अपनी नाबालिग बच्ची को मत खोजो, वह कटिहार में मेरे पास है और वह वापस नहीं जाएगी. नाबालिग की मां ने इसकी सूचना थाने को दी
जमुई पुलिस ने तत्परता दिखाई और नाबालिग को कटिहार से बरामद करते हुए कटिहार के मोफरगंज नंबर 3 निवासी इमरान आलम उर्फ चांद (उम्र 28 वर्ष), मो. आफताब अंसारी (उम्र 32 वर्ष) तथा मोहम्मद सद्दाम हुसैन (उम्र 27 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया.
केस का ट्रायल : डीएम-एसपी के द्वारा एक पत्र भेजकर पाक्सो न्यायालय से आग्रह किया गया कि इस घृणित कांड का स्पीडी ट्रायल किया जाए. जिसे पोक्सो न्यायालय के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने स्वीकार करते हुए मामले को गंभीरता से लेकर स्पीडी ट्रायल प्रारंभ कर दिया. 17 जनवरी 2026 को इस मामले में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया.
22 जनवरी 26 को मामले में न्यायालय ने संज्ञान लिया. 27 जनवरी को न्यायालय के आदेश पर गवाहों की लिस्ट बनाकर स्पेशल पीपी मनोज शर्मा द्वारा पीड़िता की ओर से गवाही प्रारंभ कर दी गई. पीड़ित पक्ष की ओर से पीड़िता, उसकी मां, डाक्टर नम्रता सिन्हा, पुलिस पदाधिकारी और स्कूल के प्रधानाध्यापक की गवाही कराई गई.
19 फरवरी से 28 फरवरी तक दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद 16 मार्च को न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने गवाहों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य, वकील की दलील को सुनने के बाद तीनों अभियुक्तों को मामले में दोषी ठहराया. 24 मार्च 2026 पोक्सो के विशेष अदालत में तीनों को सजा सुनाई. नए कानून बीएनएस की जिन धाराओं में अभियुक्तों को सजा सुनाई उसमें अधिकतम मृत्यु दंड का प्रावधान है और कम से कम 20 साल या अंतिम सांस तक जेल के अंदर रहने की सजा का प्रावधान है. बीएनएस की धारा 137(2),96 और पाक्सो एक्ट की धारा 6, 17 में सजा सुनाई गई.






