वैसे तो पवन खेड़ा की पर्याप्त हो-हो छि-छि हो चुकी है पर जब तक इसपर एक ट्रिब्यूट पोस्ट नहीं लिख देते मन मे चुरचूराटा चलता ही रहेगा।
हालांकि बंदे के इरादे नेक थे और वो बस ये दिखाना चाहता था कि भारत अमेरिका से अधिक सशक्त है और अमेरिका को अपना माल निकालने के लिए भारतीय ध्वज वाले मालवाहक पोतों की जरूरत पड़ रही है इसलिए हम थोड़ी नरमी तो बरत ही सकते हैं।
तीन दिन पहले कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा और कई अन्य टूलकिटियों ने भाजपा सरकार पर जहाज शिवालिक और नंदादेवी के नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के बाद मिली एक बड़ी कूटनीतिक जीत को जबरन का हो हल्ला बताकर पेश करने का आरोप लगाया था।
साथ ही ये भी कहा कि भारतीय जनता के साथ धोखा हो रहा है, पवन खेड़ा का दावा था कि शिवालिक और नंदा देवी भारत को ईंधन नहीं पहुंचा रहे बल्कि अमेरिका के जैक्सन्स जा रहे थे। जिसकी पुष्टि मरीन ट्रिफिक के डाटा से इन्होंने कर ली है।
अब पहला सवाल ये उठता है कि जेक्शन्स बंदरगाह का ही ज़िक्र क्यों किया और मरीन ट्रिफिक पर ऐसा क्या दिखाया जो पवन खेड़ा जासूस विजय बनने निकल पड़े। जबकि अमेरिका में जैक्सन नाम का कोई ऐसा बड़या तटीय पोर्ट नहीं है जो बड़े एलपीजी टैंकरों को बर्थिंग या डॉकिंग दे सके।
हाँ मिसिसिपी नदी के किनारे एक जैक्सन पोर्ट
जरूर है और फ्लोरिडा में जेक्सविले भी।
पर ये पवन खेड़ा की दी गई जानकारी से मैच
नहीं खाते हैं।
एक्चुली कई बार ट्रांसपोर्टर्स माल की एंट्री मैन्युअली भरते हैं जो मरीन ट्रिफिक में भी डिटेक्ट होती है।
मालवाहक पौत के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम में भी जब कभी एंट्री शो नहीं होती तब मैन्युअली दर्ज कर देते हैं। इसका जहाज के रिपोर्टेड डेस्टिनेशन से कोई सम्बन्ध नहीं होता है और ये कोई भी ऑथोराइज़्ड व्यक्ति या यूनिट ऑटोमेटिक प्रूफिंग नहीं कर सकती।
कई बार मालवाहक पौत की पिछली यात्रा या डेस्टिनेशन का रिकॉर्ड इसमें वैसे का वैसा ही रह जाता है क्योंकि मैन्युअली यदि एंट्री हुई है तो हटाया भी मैन्युअली ही जायेगा।
अब जैक्शन पोर्ट तो नदीय बंदरगाह है तो वहां का लोकेशन किसी बड़े जहाज पर क्यों दिखाया ये सम्भवतः शिपिंग यूनिट की एंट्री करते समय गलत नाम चुनने से हो सकता है जिसे सामान्य एरर समझकर उन्होंने जाने दिया।
वैसे भी मरीनट्रैफ़िक जैसे पब्लिक ट्रैकर’ चालक दल के रिपोर्ट किए गए डेस्टिनेशन और जेनुअन शिप रुट सिस्टम से मैच कम ही करते हैं क्योंकि ये अमूमन कोई काम का नहीं होता है और शिप की ताजा GPS लोकेशन उसका एक्चुअल रुट दर्शा देती है।
तो पवन खेड़ा ने जैसे ही मरीन ट्रैफिक पर शिवालिक को सर्च किया रुट में कहीं जेक्शन्स नजर आ गया और बस फिर क्या था….
राजनीति में तो वैसे भी सीधा फंडा है, जिस कुत्ते को हड्डी मिल जाये वो सरपट दौड़ लगा देता है अकेले में मजे से खाने के लिए बिना ये विचारे की हड्डी असली है या प्लास्टिक की, जो देकर टीथिंग के समय पेट्स लवर अपने पेट्स को टूटिया बनाते हैं।
तो पवन खेड़ा जिसे हड्डी समझ रहे थे असल मे वो मोदी जी के भूरा का बचपन वाला टीथर था जिसे PMO की साप्ताहिक डस्टिंग के बाद नगरनिगम की कचरा गाड़ी में फेंक दिया गया था और सूंघते हुए पवन खेड़ा ने उसे मरीन ट्रैफिक पर लोकेट कर लिया।
अब बात निकली है तो ये भी जानते चलें कि नेचुरल गैस की आपूर्ति अमेरिका घर मे ही पूरी कर लेता है और अमेरिका के घरों में पाइपलाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस और बिजली का इस्तेमाल होता है। यहाँ घर भूमिगत पाइपलाइनों के एक बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं जो सीधे प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करते हैं। एलपीजी का उपयोग केवल कुछ ही घरों में होता है जहां पाइपलाइन की पहुँच नहीं है या फिर जो लोग जंगल कैम्प या आउटडोर कुकिंग करते हैं।
खैर….
मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि पवन खेड़ा दिल्ली के सबसे प्रतिभाशाली राजनेताओं में से एक हैं जो काम करने और उसे बिगाड़ने की बराबर क्षमता रखते हैं।
इसलिए सरकार चाहे तो दो में से एक जहाज की पूरी गैस इनकी गान में डाल सकती है ताकि सुप्रिया जी के घर सालभर के लिए ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके
और पवन खेड़ा को ये यकीन हो जाए कि
जहाज किधर से आकर किधर को घुसे हैं।✌️🤟😎
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सोशल मीडिया से साभार






