एक हफ़्ते के अंदर मोदी हिंदू हृदय सम्राट से सिर्फ़ “तेली” हो गए। उनके 50 वर्षों की तपस्या एक हफ्ते में भुला दी गई।
कैसे- कैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं? कैसी कैसी गालियां दी जा रही हैं।
उनकी मां तक को नहीं छोड़ा, पत्नी को लेकर गंदी गंदी टिप्पणियां हो रही हैं।
अच्छी बात ये है कि ऐसा कहने वाले अधिकांश कल तक मोदी समर्थक , राष्ट्रवादी और हिंदुत्ववादी ही थे, आजकल सिर्फ़ ब्राह्मण, भूमिहार या सिर्फ़ राजपूत बनकर रह गए हैं।
कृतघ्नता…?
नहीं, बिल्कुल नहीं
वरिष्ठ पत्रकार Shashi Singh जी कहते हैं कि कुछ जातिवादी सवर्ण पहले से ही भरे बैठे थे, जात की जगह हिंदुत्व की राजनीति के कारण उनके जातीय संगठनों को वो इज़्ज़त नहीं मिल रही थी। मन की भड़ास निकालने का मौका UGC के बहाने मिल गया।
उनका मोदी और भाजपा समर्थन
“Conditions applied” की तरह है।
हां, कुछ लोग इसका फायदा उठाकर खेल भी रहे हैं। उन्हें खेलना भी चाहिए, क्योंकि “घर फूटे तो जेवार लूटे”
“जाति की भावना, धर्म की भावना से ज़्यादा प्रबल होती है” कहीं सुना था, आज साक्षात् देख रहा हूं।
कल तक हम जैसे लोग राष्ट्रवादी हुआ करते थे, आज सवर्ण विरोधी और समाज के गद्दार हो गए हैं। वो भी सिर्फ़ एक हफ़्ते में।
26 साल की राष्ट्रवादी पत्रकारिता को 6 दिन भी नहीं लगे “गद्दार” बनने में
एक ब्राह्मण सरनेम वाले ने मुझे “वर्ण शंकर” लिखा, एक सिंह जी ने मेरी पैदाइश पर सवाल उठाया। चलो, ये भी अच्छा है।
ऐसा है कि मुझे अब भी उस व्यक्ति पर विश्वास है, जिसे मैं 30 सालों से खुद को राष्ट्र की वेदी पर होम होते हुए देख रहा हूं। मुझे आज भी उस व्यक्ति पर विश्वास है जो 24 घंटे बिना छुट्टी लिए मां भारती का यश बढ़ा रहा है। मेरा विश्वास किसी मार्केट के प्रोडक्ट की तरह “Conditions Applied” की तरह नहीं है।
“नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि”
डॉ नरेश वर्मा
फतेहाबाद आगरा
सक्रीय सदस्य भाजपा
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