दिग्विजय सिंह जी जो कि ugc के नए बिल की कमेटी के अध्यक्ष हैं।
उन्होंने बड़ी चालाकी से 2 विषय ऐसे जुड़ने ही नही दिए, जिससे सामान्य पूरी तरह से बरगला जाए
1- सभी को पीड़ित नही माना
2- झूठी शिकायत पर कार्यवाही हटा दी
ये दोनों ही विषय विलोपित हो गए और फिर उनका प्रचार भी किसी न किसी माध्यम से हो गया।
अब जो काँग्रेस का विचार है जाति आधारित देश को बांटना उसमें दिग्विजय सिंह जी ने उसका चित्रण कर दिया।
पहले सामान्य वर्ग को बिल्कुल ही छोड़ दिया और आरक्षित वर्ग और गैर आरक्षित के बीच वैचारिक लड़ाई खड़ी कर दी।
खैर सरकार अब एक कमेटी बनाएगी और सबका ध्यान रखते हुए भेदभावपूर्ण विचार को खत्म करेगी।
लेकिन काँग्रेस की विचारधारा सभी के सामने प्रस्तुत है कैसे भी हिन्दू बंट जाए, जिसे gen sc st obc में बांट दिया जाए।
।सावधान रहिए, सतर्क रहिए, एक रहिए।
दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली किस कमेटी ने की थी UGC रूल्स की सिफारिश, कौन हैं 29 सदस्य?
दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली किस कमेटी ने की थी UGC रूल्स की सिफारिश, कौन हैं 29 सदस्य?
संक्षेप:
UGC Rules 2026: दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं।
UGC Rules 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके मुताबिक सभी यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थानों के अंदर एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी उस संस्थान के अंदर SC/ST या OBC कैटगरी के छात्रों, शिक्षकों या गैर शिक्षण कर्मियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनेंगी और तय समय-सीमा में उसका निपटारा करेगी। देश भर का सवर्ण समाज UGC के इस नियम का विरोध कर रहा था। बड़ी बात यह है कि जिस संसदीय समिति की सिफारिश पर UGC ने यह कानून बनाया है, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह है। उनके साथ इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इनमें कई भाजपा के सांसद हैं और सवर्ण समाज से आते हैं।
दरअसल, यह सिफारिश शिक्षा, महि्ला, बच्चों, युवा और खेल पर संसद की स्थाई समिति ने की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में 21 लोकसभा और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। कुछ नाम तो चौंकाने वाले हैं। दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं।
समिति के सदस्यों में कौन-कौन?
संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध नामों के मुताबिक इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह के अलावा भीम सिंह (भाजपा नेता, बिहार से राज्यसभा के सांसद) बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM नेता और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद), घनश्याम तिवाड़ी(भाजपा नेता, राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद), रेखा शर्मा (भाजपा नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष), सी. सदानंदन मास्टर (केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और केरल से राज्यसभा सांसद), सिकंदर कुमार (भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद), सुनेत्रा पवार (एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद) और स्वाती मालीवाल (AAP की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद) हैं।
(एक विश्लेषण)






