Monday, February 2, 2026
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देश के गद्दार: सेक्युलर,लिबरल सूअर गैंग,विक्टिम कार्ड खेलने की आदि

#साजिश – सरजील इमाम और उमर खालिद को देश की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत न दिये जाने पर मातम मना रहे लोगों का तर्क है कि 5 साल हो गए जमानत नही दी गई. जज बिके हुए हैं, केंद्र सरकार के इशारे पे काम कर रहे हैं आदि आदि
उन सभी लोगों और भारत के तमाम लोगों के सामने आज एक केस पेश रहा हूँ जो सारे जवाब दे देगा 🔖
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के बाहर मोटर साइकिल पर रखे हुए धमाके हुए इन धमाकों में 6 लोगों की मौत हो गई जबकि 100 लोग घायल हुए।
हरियाणा, महाराष्ट्र और केंद्र तीनो
जगह कांग्रेस की सरकार थी 🔖
मालेगांव धमाकों में महाराष्ट्र एंटी टेरर स्‍क्वॉड ATS जांच शुरू की लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की संदिग्‍ध भूमिका मानते हुए अरेस्ट कर लिया गया।। गिरफ्तार होते ही सेना की ओर से पुरोहित के खिलाफ कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी के आदेश दे दिए गए और इसके बाद उन्हें सेना से हटा दिया गया था🔖
🆎ज़रा कर्नल श्रीकांत पुरोहित के बारे में जान लें 🔖
श्रीकांत पुरोहित एक महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता बैंक अधिकारी थे. कर्नल पुरोहित का जन्म पुणे में हुआ और उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अभिनव विद्यालय में की, जबकि कॉलेज की शिक्षा गरवारे कॉलेज से पूरी की.
उनकी शादी डॉ अपर्णा से हुई वो पेशे से डॉ हैं
कर्नल के पिता ने पुणे की एक पॉश कॉलोनी
ने बंगला बनाया था जिसका नाम ‘संस्मृति’ है़।
मतलब शिक्षित और उच्च मिडिल क्लास फैमिली।
साल 1994 में पुरोहित को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से पासआउट होने के बाद मराठा लाइट इनफेंट्री में कमीशन मिला। इसके बाद वह जम्मू कश्मीर भेजे गए और यहां पर बीमार पड़ने के बाद उन्हें मेडिकल लेवल पर डाउनग्रेड कर दिया गया। इसके बाद उन्हें यहां से मिलिट्री इंटेलीजेंस में शिफ्ट कर दिया गया। साल 2002 से 2005 की शुरुआत की पुरोहित सेना की इंटेलीजेंस फील्ड सिक्योरिटी यूनिट एमआई-25 के साथ जुड़े और जम्मू कश्मीर में अहम काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस का हिस्सा बने।जब उन्हें गिरफ़्तार किया गया तब वो सेना
की मिलिट्री इंटेलिजेंस के लिए ही काम कर रहे थे🇮🇳

जब पुरोहित को नासिक के देओलाली में लाइजन यूनिट ऑफिसर के तौर पर भेजा गया और इसी समय वह एक रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय के संपर्क में आए थे🔖

कर्नल श्रीकांत पुरोहित पर आरोप क्या लगाया गया था🔖
मामले में दायर ATS की पहली चार्जशीट के मुताबिक अभियुक्त प्रसाद पुरोहित ने साल 2007 में सेना के ही रिटायर्ड अफसर रमेश उपाध्याय संग मिलकर ‘अभिनव भारत’ नाम का एक संगठन बनाया जिसका उद्देश्य एक “पृथक हिंदू राष्ट्र का निर्माण करना था” जिसका अपना अलग संविधान और अलग भगवा ध्वज हो. ATS के मुताबिक़ ‘अभिनव भारत’ संगठन के लोगों ने फ़रीदाबाद, कोलकाता, भोपाल, जबलपुर, इंदौर और नासिक शहरों में बैठकों की
और धमाके करने की आपराधिक साज़िशें रचीं.
‘अभिनव भारत’ संगठन अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए पूरे भारत से लोगों को अपने साथ जोड़ रहा था.
पुरोहित पर सेना से 60 किलो RDX चुराने, अभिनव भारत को फंडिंग करने और संगठन के लोगों को ट्रेनिंग देने का आरोप था। उनपर आरोप लगाया था कि इसी RDX के एक छोटे से हिस्से का इस्तेमाल मालेगांव ब्लास्ट में किया गया था 🔖
इस केस में Lt Col Purohit समेत पूर्व भाजपा सांसद Pragya Thakur, मेजर रमेश उपाध्याय (रिटायर्ड) अजय रहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में तीन और आरोपी बनाए गए थे इंदौर निवासी #रामजी_कलसांगरा एवं #संदीप_डांगे और #दिलीप_पाटीदार उनकी तलाश आज तक पुलिस कर रही है आजतक नहीं मिले फ़िर गये कहाँ Next पार्ट में

उस वक्त ATS चीफ थे #हेमंत_करकरे
और पुलिस कमिश्नर के #परमवीर_सिंह
नाम याद रखियेगा आगे चलकर इन्हें जोडा जायेगा!

उस वक़्त केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सार्वजनिक तौर पर ‘#भगवा_आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया साल 2010 में दिल्ली में सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस निदेशकों DGP और IGP के एक सम्मेलन में उन्होंने कहा था, “भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कोशिशें बंद नहीं हुई हैं. हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ की एक घटना सामने आई है, जिसके तार पहले के कई बम विस्फोटों से जोड़े गए है।
जिन जिन शब्दों नामों को हाई लाइट किया गया है उन शब्दों और नामों को याद रखें next भाग में, इस कड़ियों शब्दों नाम 26/11 हमले से जुड़ेंगे।
तब आपको असली साजिश और खेल समझ आ जायेगा

खैर 2011 में ATS ने इस जांच को NIA को सौंप दिया
2008 से शुरू हुआ मुकदमा 2016 तक पहुँच गया था
कर्नल श्रीकांत पुरोहित और किसी भी आरोपी की जमानत नही हुई लगातार जेल और हेयरिंग होती रही ATS ने यह मामला NIA को सौंपे जाने से पहले 2 चार्जशीट दाखिल की थीं. इसके बाद NIA ने 2016 में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया इसके बाद इस मामले में एक लंबी न्यायिक प्रक्रिया चली.
NIAकी जाँच ATS की शुरुआती दिशा से मिलती जुलती थी, फिर भी एजेंसी की ओर से कही बातों पर विवाद हुआ

NIA ने इस मामले में अभियुक्तों पर से ‘मकोका’ की धाराएँ हटाने की सिफ़ारिश की. साथ ही यह भी कहा कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर समेत कुछ अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आगे मुक़दमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं.
हालाँकि साल 2017 में विशेष अदालत ने मकोका हटाने की अनुमति तो दी, लेकिन साध्वी प्रज्ञा और अन्य छह लोगों को दोषमुक्त करने की अनुमति नहीं दी.
कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि बाइक में बम था या साजिश हुई. यूएपीए की धाराएं भी लागू नहीं हो सकीं, क्योंकि तय प्रक्रिया में खामियां थीं.

ATS और NIA की चार्जशीट में विसंगतियां थी।

फिंगरप्रिंट्स का अभाव और गवाह भी पलट गए।

अदालत ने कहा कि यह आरोप लगाया गया था कि विस्फोटक पुरोहित ने कश्मीर से हासिल किया था, लेकिन ‘इसका कोई सबूत नहीं दिया गया और यह भी प्रमाणित नहीं किया गया कि किसी भी अभियुक्त के घर पर बम तैयार किया गया था’ 🔖
31 जुलाई को अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि इन सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जो मुक़दमा खड़ा हुआ, वह अभियुक्तों का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है जिस मोटरसाइकिल पर विस्फोटक रखा गया था,
उसका साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ संबंध सिद्ध होता हो, ऐसा ठोस प्रमाण नही है अदालत ने कहा था🔖

जिन बैठक मे इस साजिश रचने का आरोप लगा था
न्यायाधीश लाहोटी ने फ़ैसला सुनाते समय कहा
कि इन बैठकों के होने के कोई भी विश्वसनीय
सबूत अदालत के सामने पेश नहीं किए गए🔖
इन अभियुक्तों पर यह आरोप भी था कि उन्होंने
मिलकर ‘अभिनव भारत’ नामक संगठन की
स्थापना की और उसी के तहत यह साज़िश रची.

अदालत ने कहा कि भले ही अभियुक्तों के बीच हुए कुछ आर्थिक लेन-देन के सबूत पेश किए गए, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि वह पैसा किसी हिंसक गतिविधि के लिए इस्तेमाल हुआ 🔖
न्यायाधीश लाहोटी ने फ़ैसले में महाराष्ट्र एटीएस की शुरुआती चरण में की गई जाँच की भी आलोचना की.

अदालत ने कहा कि अभियुक्तों और उनसे संबंधित लोगों के कॉल रिकॉर्ड निकालते समय ज़रूरी क़ानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. इसके लिए ज़रूरी अनुमति भी नहीं ली गई थी.🔖

अदालत ने ये भी कहा कि जहाँ यह घटना हुई,
वहाँ पंचनामा भी सही तरीक़े से नहीं किया
गया और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई 🔖

“कुल मिलाकर सरकारी पक्ष विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा और केवल संदेह के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. भले ही यह गंभीर अपराध हो, लेकिन सबूतों के अभाव में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देना पड़ रहा है.”ऐसा कहते हुए
अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था

न्यायाधीश लाहोटी ने कहा, “केवल शक के
आधार पर आरोप सिद्ध नहीं किए जा सकते

सत्य की जीत हुई झूठ साजिश की हार हुई

जेल में रहते हुए इनके साथ क्या-क्या हुआ वह किसी और भाग में बताया जाएगा जेल से निकलते इन्होंने कहा हमें अपने देश के कानून संविधान पर भरोसा था कि हमको न्याय मिलेगा हमको न्याय मिला सत्यमेव जयते🇮🇳

कर्नल पुरोहित की फिर से सेना में वापसी
हुई और उनका प्रमोशन भी मिल गया था 🇮🇳
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कर्नल पुरोहित और सभी लोग बेगुनाह होते हुए भी 9 सालों तक जेल में रहे जो हीरो थे उन्हें विलेन बनाया। उनको जमानत नहीं मिली जेल में वो भी बन्द ही रहे🔖
आज जिस तरह सब्जी लीमा और उमर खालिद के लिए रंडी रोना रो रहे हैं कांग्रेसी वामपंथी लिबरल सेकुलर ये बोलकर की 5 साल से जमानत नही मिली।
जबकि अभी उमर खालिद जमानत पर था अपनी बहन की शादी में और बाकियों को जमानत हो गया
अदालत में मेरिट के केस के हिसाब से इन दोनों को जमानत नहीं दी तो कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे लोग कोर्ट में रहते हैं कि इंसानियत मानवता के लिए इनको जमानत दे देनी चाहिए🔖
👌Ok

और यह सेक्युलर लिबरल और वामपंथी मोमिन लोग बोल रहे हैं कि मुस्लिम के नाते उसे जमानत नहीं मिली
Ok👌

तो क्या देश की सेवा करने वाले श्रीकांत राजपुरोहित मेजर रमेश उपाध्याय साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और
अन्य सभी मानव नहीं थे इंसान नहीं थे?????

वह तो हिंदू थे ना फिर क्यों नहीं मिली उनको?

उस समय तो सरकार सेक्युलर लिबरल ऊपर से
नीचे तक कांग्रेस की थी सिस्टम भी उनका ही था?

मतलब तब अदालत सही थी और आज बिकी हुई है
मोदी की गुलाम है संघी और बजरंगी हो गई है? 😲

अरे दोगलों लंपट लोगों शर्म करो बेशर्म लोगों

गिरगिट भी इतना रंग नहीं बदलता है
चंद वोट और सत्ता के लिए कितना
गिरोगे कितना प्रपंच करोगे झूठ बोलोगे

वो तो पैदा ही विक्टिम कार्ड लेकर हुए हैं🔖
कुछ भी हो मुस्लिम होने के नाते ये तो वो
बाकी जिनको जमानत मिली वो हिंदू हैं क्या?
या फिर संघ बीजेपी के एजेंट हैं कौन हैं वे?

सारे तथ्य आपके सामने है जनता फैसला करें।
रोहताश कुमार बंसल

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