Monday, February 2, 2026
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क्योंकि वो काफिर है,मुसलमान नहीं

ये तश्वीर आप नहीं पहचानते होंगे….
अपने दौर की सबसे मशहूर पाकिस्तानी अदाकारा थीं झरना बसक…
जिन्ह फिल्मों में शबनम नाम से पहचान मिली…

तारीख़ थी 13 मार्च 1978, लाहौर
शहर के सबसे संभ्रांत इलाकों में से एक गुलबर्ग में, शबनम देर रात शूटिंग से घर लौटी। तरोताज़ा होने के बाद, रात करीब 1 बजे वह अपने पति के साथ रात का खाना खाने बैठी।

उनका इकलौता बेटा, रॉनी, जो नाबालिग था, पास के कमरे में सो रहा था।
अचानक, सात लोग पीछे के लॉन के दरवाज़े से घर में घुस आए और अंदर धावा बोल दिया। किसी को कुछ समझने का मौका मिलता, उससे पहले ही उन्होंने अभिनेत्री के पति को बाँध दिया। चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच रॉनी की नींद खुल गई और वह अपने कमरे से बाहर आ गया; उसे भी बाँध दिया गया। इसके बाद, पति और बेटे के सामने ही उन लोगों ने शबनम के साथ बार-बार सामूहिक ब•ला•त्का•र किया।

पूरी रात चली इस बर्बर दरिंदगी के बाद, भोर होते ही ब•लात्•का•री वहाँ से चले गए।

इस गैंग का लीडर था पाकिस्तान के बड़े राजनैतिक व्यक्ति फ़तेह खान बंदील का भतीजा उमर अता खान….
पकड़े भी गए…. फ़ास्ट ट्रायल भी हुआ… फाँसी की सजा भी…

फिर शबनम को तानाशाह ज़िआ उल हक़ का फरमान मिला…. और खुद शबनम ने अपराधियों को मांफ करने की याचना कोर्ट से की….. सभी अपराधी आज़ाद हो गए

शबनम उसके बाद पाकिस्तान से बाहर न निकल पायी कभी…. न कभी उसका कोई इंटरव्यू आदि हुआ…
वो बंधक रही…
वहीं उमर अता खान राजनीति की ऊंचाई पकड़ता रहा…. वो सार्वजनिक मंच से भी अपनी करतूत बयान कर हँसता था…

1999 में शबनम पाकिस्तान से निकल कर बांग्लादेश पहुंच गयी और वहीं गुमनाम जिंदगी जी आगे…

शबनम का गुनाह बस इतना था कि वो का•फ•र थी…

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