पप्पू की शिक्षा-दीक्षा
जब राहुल गाँधी का जन्म से लेकर आज तक का सारा जीवन रहस्यमय और विवादित है, तो उनकी शिक्षा इससे कैसे मुक्त रह सकती है! उनकी प्रारम्भिक शिक्षा सेंट कोलम्बिया स्कूल, नई दिल्ली में हुई थी। फिर वे दून स्कूल, देहरादून में 1981 से 1983 तक पढ़े, जहाँ ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन प्रसाद उनके सहपाठी थे। इन्दिरा गाँधी की हत्या के बाद सिख आतंकवादियों के डर से उनकी आगे की शिक्षा घर पर ही हुई और वहीं कड़ी सुरक्षा में उनकी परीक्षा करायी जाती थी। इंटरमीडियेट में उनके मात्र 61 प्रतिशत अंक आये थे।
इतने कम अंकों के बाद भी 1989 में सेंट स्टीफन कॉलेज, नई दिल्ली में उनको बी.ए. (ऑनर्स) कक्षा में प्रवेश दे दिया गया, जबकि सामान्य छात्रों के लिए इस कक्षा का कटऑफ 90 प्रतिशत था। इस बात को लेकर मीडिया में बहुत बवाल हुआ। प्रश्न उठा कि क्या राहुल गाँधी को ईसाई होने की वजह से कम अंक होने के बाद भी प्रवेश दिया गया है? परन्तु सोनिया गाँधी का परिवार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना नहीं चाहता था कि वे कैथोलिक ईसाई हैं, इसलिए कॉलेज प्रशासन से कहलवाया गया कि राहुल गाँधी को स्पोर्ट्स कोटा में एडमिशन मिला है।
इस पर लोगों का माथा popकौन सा स्पोर्ट्स भैया? राहुल गाँधी किसी खेल में प्रवीण थे ऐसा तो कभी किसी ने न सुना, न देखा! तो कॉलेज ने कहा कि ‘शूटिंग में पारंगत होने की वजह से स्पोर्ट्स कोटा में राहुल गाँधी का प्रवेश स्वीकार किया गया है।’ जबकि वास्तव में राहुल गाँधी ने कभी किसी खेल की किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया था। नियमानुसार राज्य स्तर पर कोई खेल टूर्नामेंट खेलने पर ही कोई व्यक्ति स्पोर्ट्स कोटा पाने के यौग्य होता है, पर राजकुमार के लिए ऐसे नियमों की चिन्ता कौन करता है!
सेंट स्टीफन कॉलेज में राहुल गाँधी का प्रवेश तो हो गया, लेकिन वे पढाई में अपनी कक्षा में पिछड़ने लगे। कारण यह था कि कक्षा के अन्य छात्रों का बौद्धिक स्तर पप्पू से बहुत ऊपर था। राहुल गाँधी के बेवक़ूफ़ी भरे सवालों पर सहपाठी हँस देते थे। इससे राहुल कक्षा में अलग-थलग पड़ गये और धीरे-धीरे कुंठा का शिकार होने लगे। अपने पहले वर्ष में उन्होंने मात्र 45.9 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इसलिए एक साल बाद ही उन्होंने सेंट स्टीफन कॉलेज छोड़ दिया। बताया गया कि वे हार्वर्ड जा रहे हैं।
1990 में राहुल गाँधी अमेरिका चले गए और ‘राउल अल्बर्टाे विंसी’ के नाम से मैसाचुसेट्स में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में स्नातक डिग्री की पढ़ाई की। वहाँ पढ़़ाई का दबाव वे झेल नहीं सके और सीनेटर गॉर्डन, जो उनके पिता राजीव गाँधी के निकट मित्र थे, द्वारा कई सिफारिशों के बावजूद वे 9 में से 7 विषयों में फेल हो गये। वहाँ से भी निराश होकर राउल अल्बर्टाे विंसी अब रॉलिंग कालेज, फ्लोरिडा में चले गए। वहाँ उन्होंने 1994 में एक अज्ञात विषय में बी.ए. की डिग्री प्राप्त की, जिसमें उनका ग्रेड बिन्दु औसत (जीपीए) मात्र 2.2 था। इस पढ़ाई के बीच में वे कथित तौर पर अवसाद, जिसे कई लोग ड्रग एडिक्शन भी मानते हैं, के कारण साढ़े चार महीनों के लिए एक क्लीनिक में भी भर्ती हुए थे। दावा किया जाता है कि बाद में उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज (लंदन) से ‘विकास अध्ययन’ विषय में एम.फिल. डिग्री प्राप्त की थी।
इसके बाद राहुल गाँधी ने ‘राउल विंसी’ के ही नाम से एक अमेरिकी कम्पनी के लन्दन ऑफिस में नौकरी की, जिसके बारे में आप पिछली कड़ी में पढ़ चुके हैं। परन्तु अन्ततः तो उन्हें अपने पिता या परिवार की राजनैतिक विरासत सँभालनी थी, इसलिए राजनीति में प्रवेश करने के लिए वे 2004 में भारत आ धमके। 2004 में वापस आये तो कांग्रेसी उनकी शिक्षा के बारे में अलग-अलग बातें करते थे। कोई कहता था कि राहुल ने एमबीए किया, तो कोई एम.फिल. बताता था। परन्तु इस बारे में ठोस जानकारी किसी चमचे के पास आज भी नहीं है। असल में उनकी वास्तविक योग्यता इतनी भी नहीं है कि किसी कार्यालय में चपरासी की नौकरी भी पा सकें।
वैसे संसद की वेबसाइट पर सभी सांसदों का विवरण दिया जाता है। वहाँ राहुल गाँधी की योग्यता मात्र ‘एम.फिल.’ लिखी हुई है। वहाँ इससे पूर्व की किसी डिग्री का कोई उल्लेख नहीं है। एक रोचक बात यह है कि ‘सांसद की किन खेलों में रुचि है’ इस कॉलम में राहुल गाँधी के नाम के सामने चार खेलों के नाम दिये गये हैं- तैराकी, साइकिलिंग, दौड़ना और ऐकिडो। इनमें उस खेल ‘शूटिंग’ का कोई उल्लेख नहीं है, जिसमें ‘पारंगत’ होने के नाम पर उन्हें सेंट स्टीफन कॉलेज में प्रवेश दिया गया था। स्पष्ट है कि वह सब फर्जीवाड़ा था।
अपने छात्र जीवन में इतने योग्य विद्यार्थी रहे पप्पू जी ने यदि बड़े होकर ‘आलू से सोना बनाने वाली मशीन’ का आविष्कार किया था, तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है।
— डॉ. विजय कुमार सिंघल






