राजधानी जयपुर से करीब 340 किलोमीटर दूर भीलवाड़ा जिले के एक गांव पंडेर में लड़कियों की खरीद-बिक्री का मामला सामने आया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि गांव की कई बस्तियों में लड़कियों को बेचकर देह व्यापार करवाया जाता है. भीलवाड़ा के पंडेर गांव की कई बस्तियों में गरीब परिवारों की लड़कियों को दलाल स्टाम्प पेपर पर खरीदकर सौदा करते हैं. गांव में कई ऐसी बस्तियां हैं जहां दो पक्षों के किसी विवाद पर जातीय पंचायत बैठती है यहां से लड़कियों की निलामी का खेल शुरू किया जाता है. बेटियों का सौदा कराने में दलाल की अहम भूमिका होती है.
लड़की को बेचने की पूरी प्रक्रिया स्टांप पेपर पर होती
जानकारी के मुताबिक किसी भी विवाद में जातीय पंचायत जिसको दोषी मानती है उस पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है और जुर्माना नहीं होने पर पंचों की ओर से घर की बहन-बेटी को बेचने का दबाव बनाया जाता है. इसके बाद यही पंच दलाल बनकर लड़कियों को खरीदने और बेचने का काम करते हैं और अपना कमीशन लेते हैं. बताया गया है कि पंचों द्वारा किसी भी लड़की को बेचने की पूरी प्रक्रिया स्टांप पेपर पर होती है.
भीलवाड़ा में कई बस्तियां हैं, जहां आपसी विवाद हो या किसी तरह का झगड़ा, ये लोग पुलिस के पास नहीं जाते. यहां विवाद का निपटारा के लिए जातीय पंचायत बुलाई जाती है. इन लोगों का सीधा निशाना इनके घर की लड़कियों पर होता है. यहीं से लड़कियों को खरीग फरोख्त का धंधा शुरू होता है. कोई भी विवाद हो, जातीय पंचायत कभी भी पहली मीटिंग में फैसला नहीं सुनाई जाती, कई बार पंचायत बैठाई जाती है. हर बार जातीय पंचों को बुलाने के लिए दोनों पक्षों को करीब 50-50 हजार रुपए का खर्चा करना पड़ता है. इसके बाद जिस पक्ष को पंचायत दोषी करार देती है उसे 5 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ता है.
दलाल बनकर बहन-बेटियों को बिकवाते हैं
इतना भारी भरकम जुर्माना भरना इनके लिए आसान नहीं होता. जातीय पंचायत अब उस लोगों के घर की बहन-बेटी को बेचने के लिए दबाव डालते हैं. कर्जा नहीं चुकाने पर समाज से बाहर करने की धमकी दी जाती है. इसके बाद पंच दलाल बनकर लड़कियों को खरीदारों के जरिए बोली लगाते है. पंचों को हर डील में कमीशन तय होता है. इसी कमीशन के लिए जातीय पंच गरीब परिवारों पर लाखों रुपए का जुर्माना ठोकते हैं, ताकि वह कर्जा उतारने के लिए अपने घर की लड़कियों को घर की दहलीज लांघनी पड़ती है और एक बाप को अपनी बेटी और एक भाई को अपनी बहन को बेचने के लिए मजबूर किया जाता है.
लड़कियों को किडनैप कर अड्डों पर लाया गया, दवाइयों से जवान बना कर धंधे में उतारा,
पढ़ें बच्चियों की ‘नीलामी’ का काला सच
भीलवाड़ा में लड़कियों की नीलामी और खरीद – फरोख्त को लेकर सामने आई मीडियो रिपोर्ट पर शनिवार को राजस्थान पुलिस ने कई खुलासे किए। पुलिस के अनुसार कथित मामला 3 साल पुराना है। पहले महिलाओं से वेश्यावृत्ति कराई जा रही थी। अब भी पुलिस निगरानी रख रही है।
2019 में लड़कियों की खरीद-फरोख्त का खुलासा
7 लड़कियों के साथ हुआ था अत्याचार, 2 अब अजमेर नारी निकेतन में रह रही
तब भीलवाड़ा जिले में चलाया गया था ऑपरेशन गुड़िया
मुकदमा दर्ज कर 25 आरोपियों गिरफ्तार किया
जयपुर: अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत समेटे राजस्थान (rajasthan) कई सदियों से अपनी वीरता, शौर्य, पराक्रम, भक्ति और सौदर्य के लिए दुनियाभर में विख्यात रहा है। रियासतकालीन शहरों और यहां की विरासत को निहारने आज भी देसी-विदेशी सैलानियों का तांता लगा रहता है। लेकिन सप्ताह भर से मरुधरा की अलग ही तस्वीर मीडिया रिपोर्ट्स में पेश की जा रही है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कई इलाकों में आज भी यहां लड़कियों की नीलामी होती हैं। बच्चियों का सौदा किया जाता है। दबाव बनाने के लिए महिलाओं से दुष्कर्म और स्टाम्प पेपर पर खरीद – फरोख्त होती है। देर से ही सही एक दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी चुप्पी तोड़ी और मामले की जांच पड़ताल की बात कर सच तक पहुंचने और कारगुजारी करने वालों को नहीं बख्शने की बात कही। राष्ट्रीय महिला आयोग, विपक्षी दल, सामाजिक संगठनों ने भी पूरजोर आवाज उठाई। सच क्या है? जानने के लिए राजस्थान राज्य महिला आयोग ने जिला कलेक्टर और एसपी से रिपोर्ट भी तलब की। हुआ भी कुछ ऐसा ही। शनिवार को पुलिस के मुखिया डीजीपी एमएल लाठर और जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए कई खुलासे किए।
पुलिस ने माना ऐसा हुआ, तीन साल पहले 25 लोगों के खिलाफ जुर्म साबित
राजस्थान के पुलिस महानिदेशक पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर ने शनिवार को कहा कि ‘पहले कुछ समाज विशेष में घर की महिलाओं से वेश्यावृत्ति कराए जाने जैसी सामाजिक कुरीति व्याप्त थी। वर्तमान में राजस्थान पुलिस की ओर से ऐसी अनैतिक गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखकर इन घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा चुका है। इन अवांछित गतिविधियों के संबंध में सूचना प्राप्त होते ही पुलिस ने तुरंत विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।’ मीडियो रिपोर्ट्स वाला मामला 3 साल पुराना है। कथित मामले में दो पीड़ित लड़कियों को अजमेर के नारी निकेतन में रखा गया है। 2019 में इस मामले में 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अदालत में जुर्म साबित किया जा चुका है।
लड़कियों की नीलामी होती है, मीडिया रिपोर्ट का दावा
एक मीडिया रिपोर्ट का दावा है कि जब भी दो पक्षों के बीच विशेष रूप से वित्तीय लेनदेन और ऋण को लेकर कोई विवाद होता है, तो पैसे की वसूली के लिए आठ साल से 18 साल की उम्र की लड़कियों की नीलामी की जाती है। इसी दावे पर राजस्थान की राजनीति में भूचाल आया हुआ है।
लड़कियों की नीलामी मामले में पहली बार बोले गहलोत
इस मामले में शुक्रवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया पहली बार सामने आई। गुजरात के दाहोद में उन्होंने अपने बयान में कहा कि हम किसी को बख्शेंगे नहीं। हालांकि उन्होंने इस पूरे मामले पर सख्त कार्रवाई से पहले यह भी जाहिर कर दिया कि मीडिया में खबर आई है, वास्तव में क्या स्थिति है, ये पता लगाया जा रहा है। अगर काई घटना हुई है तो हम कार्रवाई करेंगे।
सीरिया और इराक की तरह कांग्रेस के राज में ‘गुलाम’ बन रही है बेटियां
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लोकसभा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (rajyavardhan singh rathore) ने प्रदेश की बेटियों को स्टांप पेपर पर बेचे जाने की घटना को तालिबानी घटना करार दिया है। जयपुर में भाजपा मुख्यालय में मीडिया से रूबरू होते हुए कर्नल राठौड़ ने कहा कि जिस तरह से सीरिया और इराक सहित तालिबानी शासन में बेटियों को गुलाम बनाया जाता है। ठीक उसी तरह राजस्थान में कांग्रेस के राज में बेटियां गुलाम बनाई जा रही है। प्रदेश के करीब आधा दर्जन जिलों में बेटियों को गुलाम बनाए जाने की हरकत का खुलासा हुआ है। बेटियों को गुलाम बनाने का घिनौना जुर्म प्रदेश में लगातार हो रहा है और सरकार चुप्पी साधे बैठी हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने ‘नीलामी’ की जांच के लिए टीम बनाई
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कर्ज अदायगी के लिए लड़कियों की नीलामी के आरोपों की जांच के संबंध में शुक्रवार को दो सदस्यीय तथ्यान्वेषी टीम का गठन किया। आयोग ने कहा कि उसने मीडिया में आई कई खबरों का संज्ञान लिया जिनमें कहा गया है कि भीलवाड़ा में कर्ज अदायगी के विवादों को निपटाने के लिए लड़कियों की नीलामी की जा रही है।
ऐसी बर्बरता पर पुलिस और प्रशासन क्यों हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं?
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि ‘बहन – बेटियों को गुलाम बनाया जाना मानवीयता के लिए शर्म की बात है। ऐसी बर्बरता पर पुलिस और प्रशासन क्यों हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं?’ उन्होंने कहा, सरकार को अपने स्तर पर पड़ताल करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। जिस राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर हो, वहां नारी अस्मिता खतरे में पड़ जाती है।
राजस्थान में महिलाओं पर दलितों पर अत्याचार होते हैं
NHRC को जो जानकारी मिली है उसके अनुसार राजस्थान में महिलाओं की नीलामी हो रही है। हम इसकी निंदा करते हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। राजस्थान सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है। राजस्थान में महिलाओं पर दलितों पर अत्याचार होते हैं: केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले
सरकार को इसकी चिंता ही नहीं है
भाजपा नेता और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा है कि राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ऐसा लगता है कि सरकार को इसकी चिंता ही नहीं है। भीलवाड़ा की ये घटना बहुत पहले की है परन्तु ये व्यवस्था अभी भी जारी है। NHRC ने भी इसका संज्ञान लिया।
बाल अधिकार आयोग ने मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया
बाल अधिकार आयोग भीलवाड़ा में हुई इस घटना की कड़ी निंदा करता है और मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। यह कहना है राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल (Sangeeta Beniwal) का।
राजस्थान महिला आयोग ने तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की
राजस्थान राज्य महिला आयोग ने भीलवाड़ा जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से ‘लड़कियों की नीलामी’ मामले को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। मीडिया में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्टांप पेपर पर लड़कियों की नीलामी की जा रही है और जाति पंचायतों के फरमान पर महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है।
बच्चियों की खरीद-फरोख्त की सूचना पर पुलिस ने शुरू की निगरानी
पुलिस महकमे के मुखिया ने बताया महिलाओं राज्य के विरुद्ध घटित अपराधों पर राजस्थान पुलिस अत्यंत संवेदनशील है। महिला अत्याचार से संबंधित प्रकरणों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इन अपराधों की रोकथाम एवं अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिलाओं एवं नाबालिगों की खरीद-फरोख्त संबंधी समाचार सामने आने के बाद लाठर ने बताया कि महिलाओं एवं नाबालिगों की खरीद-फरोख्त एवं अनैतिक कार्य कराए जाने के संबंध में संवेदनशील स्थानों पर लगातार पुलिस निगरानी रख आसूचना एकत्रित कर रही है।
लड़कियों की नीलामी या खरीद-फरोक्त आम था, फिर चलाया ऑपरेशन गुड़िया
पुलिस के बयान अनुसार इलाके में कुछ समाज विशेष के परिवारों में महिलायों से गलत काम कराया जाता था। ऐसी परम्परा कई वर्षों से चली आ रही थी। इस तबके में इस तरह के अपराधों के खिलाफ पुलिस ने साल 2019 में अभियान भी चलाया। लड़कियों की खरीद-फरोख्त के संबंध में यह अभिया भीलवाड़ा जिले में ऑपरेशन गुड़िया के नाम से चलाया गया था।
बच्चियों को किडनैप कर अड्डों पर पहुंचा जाता, जवान होने की दवा खिलाई जाती
पुलिस के बयानों में कई खुलासे हुए हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि बच्चियों को किडनैप कर उन्हें अड्डों पर लाया जाता था। इन्हीं अड्डों पर बच्चियों को जवान बनाने के लिए दवाइयां दी जाती। फिर जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया जाता। पुलिस के बयान में यह भी बताया गया है कि पुलिस टीम ने अपह्रत बच्चियों को अपहरणकर्ताओं से खरीद वेश्यावृत्ति करवाने वाले आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है।
भीलवाड़ा और अजमेर के 5 अड्डों पर धकेला जाता
बच्चियों और महिलाओं को आरोपी भीलवाड़ा और अजमेर के अड्डों पर पहुंचाते। इन अड्डों में भीलवाड़ा का इटुन्दा, पंढेर और हनुमान नगर शामिल है। वहीं अजमेर के सांवर थाना क्षेत्र का नापाखेडा और जसवंत नगर में भी वेश्यावृत्ति के अड्डा संचालित हो रहा था। इन्हीं अड्डों पर किडनैप कर लाई गई बच्चियों को दवाओं के जरिए से जवान बनाया जाता और फिर वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेला जाता।
मुंबई,एमपी और यूपी तक जुड़े हैं तार, 7 बच्चियों को छुड़ाया गया
बच्चियों और महिलाओं के जिस्मफरोशी के दलदल में धकेलने वाले गिरोह के बारे में पुलिस ने कई ओर खुलासे किए हैं। पुलिस जांच के हवाले से बताया गया है कि गिरोह के तार राजस्थान के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र से जुड़े थे। तीन साल पहले हुई कार्रवाई के दौरान इन राज्यों के कई स्थानों पर दबिश दी गई थी। नाबालिग समेत सात पीड़ित बच्चियों को दस्तयाब कर लड़कियां खरीदने एवं बेचने वाले कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच के बाद 25 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया।
पुलिस की पड़ताल में अब और हो सकते हैं खुलासे
पुलिस ने अब तक 2019 के ऑपरेशन गुड़िया और 7 बच्चियों के रेस्क्यू का जिक्र किया है। यह भी बताया है कि 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। लेकिन ताजा मीडिया रिपोर्ट्स की पड़ताल अभी बाकी है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो 2019 जैसे हालात अब भी कई पिछड़े इलाकों में हो सकते हैं। एक रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि स्टांप पेपर पर लड़कियों की नीलामी की जा रही है और जाति पंचायतों के फरमान पर महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान राज्य महिला आयोग ने इस बारे में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट पर भीलवाड़ा जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से लड़कियों की नीलामी को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।








