Thursday, March 26, 2026
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दिग्विजय सिंह के साथ अनोखा कांड हुआ:खड़गे,थरूर,त्रिपाठी को फार्म भरने दिया, दिग्गी राजा को बस रखने को दिया फार्म

कांग्रेस का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा? इस रहस्य से करीब-करीब पर्दा उठ गया है। अंतिम समय में राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने नामांकन किया। उनसे पहले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम अध्यक्ष पद के लिए लिया जा रहा था, लेकिन खड़गे का नाम आते ही दिग्विजय सिंह ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। वैसे खड़गे के मुकाबले में कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी हैं और झारखंड के पूर्व विधायक कृष्णानंद त्रिपाठी ने नामांकन भरा है, परंतु खड़गे की जीत निश्चित है। उन्हें गांधी परिवार का आशीर्वाद प्राप्त है।

खड़गे के प्रस्तावकों में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी शामिल हैं, जो चार दिन पहले तक स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे थे। मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र 80 साल है। वो कांग्रेस के इतिहास में संभवतः अब तक के सबसे वयोवृद्ध राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं।

खड़गे की ताजपोशी से बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कुछ बरस पहले तक राहुल गांधी युवाओं को कांग्रेस पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी देकर आगे लाना चाहते थे। क्या खड़गे के अध्यक्ष बनने से राहुल का सपना टूट गया है?

राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर सीनियर्स

कांग्रेस पार्टी के पूर्व में रहे राष्ट्रीय अध्यक्षों की बात करें तो सीताराम केसरी 77 साल की आयु में शीर्ष पद पर बैठे थे, जबकि मोतीलाल नेहरू ने 67 साल की उम्र में कुर्सी संभाली थी। पार्टी ने पूर्व में कई बार युवा नेताओं को सबसे बड़े पद पर बैठने का मौका दिया है।

साल 1923 में मौलाना आजाद जब कांग्रेस अध्यक्ष बनने थे, तब उनकी उम्र मात्र 35 साल की थी। वो भारत के पहले शिक्षा मंत्री भी रहे। पंडित जवाहरलाल नेहरू 40, राजीव गांधी 41, इंदिरा गांधी 42, राहुल गांधी 47 और सोनिया गांधी 52 साल की उम्र में कांग्रेस अध्यक्ष बन गई थीं।

दिसंबर 2017 में जब राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी, तब युवा जोश का नारा पार्टी ने दिया था। राहुल गांधी ने एक पूरी यूथ ब्रिगेड खड़ी करने की कवायद शुरू की थी। देश में युवाओं को नेतृत्व देने की बात जोर-शोर से उठाई थी। राहुल की टीम में सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद, अशोक तंवर, मिलिंद देवड़ा, मनीष तिवारी, दिव्या स्पंदना, सुष्मिता देव जैसे कई युवा चेहरे हुआ करते थे।

दिग्विजय सिंह के साथ ऐसा हुआ कांड,फार्म तो खरीदने दिया पर भरने नही दिया

मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए यह एक ऐतिहासिक और दिग्विजय सिंह की जिंदगी के लिए यह सबसे बड़ी और बुरी खबर है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद हेतु चुनाव का नामांकन फॉर्म प्राप्त करने के बाद दिग्विजय सिंह मैदान से बाहर हो गए। 2018 के विधानसभा चुनाव में जैसा उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ किया था, आज ठीक वैसा ही उनके साथ हुआ है।

2018 में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव थी और ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता हुआ करते थे। मध्यप्रदेश में “अबकी बार सिंधिया सरकार” नारे लगाए जा रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता और दावेदारी इस बात से प्रमाणित होती है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपना पूरा प्रचार अभियान ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ “माफ करो महाराज” चलाया था। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई। हाईकमान यानी गांधी परिवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर तैयार था लेकिन लास्ट में दिग्विजय सिंह ने कुछ ऐसी चाल चली कि ज्योतिरादित्य सिंधिया रेस से बाहर हो गए और दौड़ में दूसरे नंबर पर चल रहे कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गए।

2022 में दिग्विजय सिंह के साथ क्या हुआ

लंबे समय के बाद दिग्विजय सिंह कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए थे। यह, वह समय है जब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेता क्षेत्रीय राजनीति में एक्टिव हो गए हैं। कमलनाथ, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल और इनके जैसे तमाम नेता जिन्हें पार्टी के युवा नेताओं को मार्गदर्शन देना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर की राजनीति करनी चाहिए। राज्यों में फ्रंट लाइन पर जाकर खड़े हो गए हैं।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के लिए दिग्विजय सिंह, पूर्णकालिक प्रचारक की तरह काम कर रहे थे। इसी दौरान कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की चर्चा शुरू हुई। स्वाभाविक है कि दिग्विजय सिंह और राहुल गांधी की बातचीत हुई। फिर इसके बारे में सोनिया गांधी को बताया गया। गांधी परिवार की सहमति मिल जाने के बाद दिग्विजय सिंह दिल्ली गए और नामांकन फॉर्म लिया।

29 सितंबर की शाम को माना जा रहा था कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस पार्टी के निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। लोगों ने बधाइयां देना शुरू कर दिया था, लेकिन रात में परिस्थितियां बदलना शुरू हुई और 30 सितंबर की सुबह सूरज की एक किरण मल्लिकार्जुन खरगे के आंगन में और दूसरी शशि थरूर की छत पर गिरी। दिग्विजय सिंह के सामने अंधेरा था।

गुरुवार की सुबह मध्य प्रदेश की राजनीति के बड़े पंडित और शिवराज सिंह सरकार के प्रवक्ता डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कमलनाथ, दिग्विजय सिंह को कभी राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनने देंगे और इसके थोड़ी देर बाद दिग्विजय सिंह ने मल्लिकार्जुन खड़गे के समर्थन में चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया।

कहा जा रहा है कि जिस प्रकार दिग्विजय सिंह लास्ट मिनट में लोगों की टांग खींचने में माहिर हैं ठीक उसी प्रकार इस चुनाव में दिग्विजय सिंह की लास्ट मिनिट में टांग खींच दी गई

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