बीजिंग: चीन में उइगर मुसलमानों के साथ क्रूर व्यवहार हो रहा है लेकिन ड्रैगन इन आरोपों को खारिज करता आ रहा है। चीन ने शुक्रवार को कहा कि फारस की खाड़ी के देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत के बाद उइगर मुसलमानों के साथ व्यवहार सहित कई मुद्दों पर उसे समर्थन प्राप्त हुआ है। चीन ने कहा कि उक्त बैठक में विदेश मंत्रियों ने संबंधों को उन्नत करने पर सहमति जतायी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि मंत्रियों और खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव नायेफ फलाह अल-हजरफ ने ताइवान, शिनजियांग और मानवाधिकारों से संबंधित मुद्दों पर चीन के “वैध रुख” के प्रति अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया।
वांग ने कहा कि उन्होंने ‘‘चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और मानवाधिकारों के मुद्दों के राजनीतिकरण को खारिज किया।’’ वांग ने कहा कि उन्होंने “खेल के राजनीतिकरण’’ को भी खारिज किया और चीन द्वारा बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक की मेजबानी किये जाने को अपना समर्थन दोहराया।
चीन पर शिनजियांग क्षेत्र में एक लाख से अधिक तुर्क मुस्लिम उइगरों को हिरासत में लेने का आरोप है। चीन ताइवान को अपना एक हिस्सा होने का दावा करता है और मानता है कि यदि आवश्यक हो तो उसे बलपूर्वक नियंत्रण में लाया जाए। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश मानवाधिकारों के हनन की आलोचना का सामना करने पर अक्सर अपने मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ बयान जारी करते हैं।
बता दें कि चीन में उइगर मुसलमानों के साथ क्रूर व्यवहार हो रहा है। वहां के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने इसका खुलासा करते हुए बताया कि शिन्जियांग प्रांत के डिटेंशन सेंटर्स में उइगर मुसलमानों को कई तरह की अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं। उन्हें कुर्सी में बांधकर रखा जाता है, कोड़ों से मारा जाता है, करंट के झटके दिए जाते हैं और झपकी लेने पर पिटाई की जाती है। व्हिसलब्लोअर पूर्व चीनी अधिकारी जियांग ने उइगरों को दिए जाने वाले भयानक टॉर्चर के बारे में बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक डिटेंशन सेंटर्स में उइगरों को टॉर्चर के लिए कुर्सी से बांध कर रखा जाता है।
पुलिसकर्मी उन्हें लात-घूंसों से पीटते हैं और उनपर कोड़े बरसाते हैं। कई बार तो इस टॉर्चर में लोगों की जान तक चली जाती है। जियांग ने बताया कि डिटेंशन सेंटर्स में बंद लोगों को नींद तक नहीं लेने दिया जाता है। झपकी लेने पर उन्हें इतना मारा जाता है कि वे बेहोश जाते हैं, होश आने पर फिर वही बर्ताव किया जाता है। पीड़ितों में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी शामिल थे।





