यह होटल वाजे के क्राइम ब्रांच ऑफिस से महज 10 मिनट की ड्राइव पर है। वाजे के इस तरह अंडरवल्र्ड से जुड़े होने पर भाजपा के प्रवक्ता और विधायक राम कदम ने कहा है कि क्राइम ब्रांच के अधिकारी द्वारा प्रसिद्ध होटल से ऐसा वसूली रैकेट संचालित किया जाना साफ दर्शाता है कि उसे सरकार में उच्च पदस्थ लोगों द्वारा संरक्षण दिया गया था।
कदम ने आगे कहा, “क्रिकेट पर सट्टेबाजी कराने वाले सिंडिकेट्स से लेकर बार और रेस्तरां से हफ्ता वसूली करने तक वाजे इस संगठित आपराधिक गिरोह को मालिक के तौर पर संचालित करता था। मुझे तो यह भी पता चला है कि सरकार ने कोविड-19 उपायों के नाम पर जो रात को 11 बजे के बाद बार बंद करने का निर्देश दिया था, उसका मकसद ही यह था कि चुनिंदा बार से हफ्ता देकर उन्हें आधी रात के बाद भी खोलने की अघोषित अनुमति दी जा सके और ऐसा हुआ भी।”
वहीं मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया मुंबई का एक प्रमुख क्रिकेट सट्टेबाज नरेश धारे कथित तौर पर महाराष्ट्र में सक्रिय विभिन्न सट्टेबाजी सिंडिकेट्स से वाजे के लिए पैसा इकट्ठा करता था। कदम ने यह भी खुलासा किया है, “ऐसे लग्जरी होटलों में महंगे सुइट्स बुक करके वाजे विभिन्न सिंडिकेट्स के संचालकों के साथ गुप्त बैठकें करता था। मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का नेतृत्व करने वाले वाजे ने ऐसे अपराध सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें शरण दी हुई थी।”
क्राइम ब्रांच मुंबई के एक पूर्व इंस्पेक्टर, जिनके अंडर में वाजे ने काम किया, वो कहते हैं, “इस बदनाम पुलिस अधिकारी ने सट्टेबाजी और हवाला रैकेट के कई मामलों की जांच की थी। काफी समय बाद मुझे पता चला कि वाजे के संयुक्त अरब अमीरात और अन्य मध्य-पूर्वी देशों से संचालित होने वाले सट्टेबाजी सिंडिकेट किंग्स से संबंध बना है।”
मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने यह आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वझे को 100 करोड़ रुपए हर महीने वसूल कर उन्हें देने को कहा था।
100 करोड़ रुपए की उगाही के आरोप में घिरे और एंटीलिया केस में गिरफ्तार API सचिन वझे को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी सामने आई है कि सचिन वझे के लिए मुंबई के एक सोना कारोबारी के कहने पर 25 लाख रुपए में 100 दिन के लिए मुंबई के ट्राइडेंट होटल में कमरा बुक था। इस कमरे का हर दिन का किराया 10 हजार रुपए था।
केंद्रीय जांच एजेंसी (NIA) को होटल से कई सबूत हाथ लगे हैं। इनमें CCTV फुटेज, बुकिंग रिकॉर्ड और स्टाफ का बयान शामिल है। NIA की जांच में सामने आया है कि सचिन वझे के लिए मुंबई के एक ट्रैवल एजेंट ने स्वर्ण कारोबारी के कहने पर 19वें फ्लोर पर कमरा नंबर 1964 बुक करवाया था। आईडी प्रूफ में होटल को उनका फेक आधार कार्ड दिया गया था, जिसमें वझे का नाम सुशांत सदाशिव खामकार दर्ज था। इस मामले में कमरा बुक कराने वाले व्यापारी से आज NIA की टीम ने पूछताछ की है।
13 लाख कैश से हुआ होटल को भुगतान
NIA की पूछताछ में कारोबारी ने बताया कि वझे ने उसके खिलाफ दर्ज दो पेंडिंग केस में फंसाने की धमकी दी थी। यह केस मुंबई के एलटी नगर और कांजुरमार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज थे। वझे ने यह भी कहा था कि अगर वह कमरा बुक करवा देता है तो वह इस केस से उसे बाहर निकाल देगा। यह भी पता चला है कि 25 लाख रुपए में से 13 लाख रुपए कैश ट्रैवल एजेंट ने होटल को दिए थे।
छिपने के लिए बुक करवाया था होटल का कमरा
NIA सूत्रों के मुताबिक, वझे को यह आशंका थी कि आने वाले समय में उसे छिपना पड़ सकता है। इसलिए उसने यह तैयारी पहले से कर ली थी। नरीमन पॉइंट स्थित होटल के एक कमरे में तलाशी टीम को ज्यादा कुछ नहीं मिला, लेकिन स्टाफ के बयान से यह स्पष्ट हुआ है कि वझे से कुछ लोग मिलने के लिए जरूर यहां आए थे। वझे 16 से 20 फरवरी तक रुका था। NIA ने यहां से 35 कैमरों के फुटेज जब्त किए हैं।
एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी स्कॉर्पियो मिलने के कुछ दिनों बाद ही इस कार के मालिक मनसुख हिरेन का शव मिला। आरोपों की सूई विवादित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की तरफ मुड़ी। उसे गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर वाजे के माध्यम से प्रतिमाह 100 करोड़ रुपए की उगाही का आरोप लगाया।
अब खुलासा हुआ है कि सचिन वाजे के लिए मुंबई के एक स्वर्ण व्यवसायी के कहने पर 25 लाख रुपए खर्च कर मुंबई के 5 स्टार होटल ‘ट्राइडेंट’ में 100 दिनों के लिए कमरा बुक कराया गया था। इस कमरे का मात्र 1 दिन का किराया 10,000 रुपए था। केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने होटल का दौरा किया और कमरे की जाँच की, जिसके बाद कई सबूत हाथ लगे। CCTV फुटेज खँगाली गई, बुकिंग रिकार्ड्स जाँचे गए और होटल कर्मचारियों के बयान दर्ज हुए।
इस कमरे का नंबर 1964 है जो 19वीं मंजिल पर स्थित है। एक ट्रेवल एजेंट ने ये कमरा बुक करवाया था। ‘सुशांत सदाशिव खामकार’ नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवा कर कमरा बुक किया गया था। जिस स्वर्ण व्यवसायी के कहने पर कमरा बुक करवाया गया था, उससे भी NIA ने पूछताछ की है। कारोबारी ने बताया कि उसके खिलाफ मुंबई के एलटी नगर और कांजुरमार्ग पुलिस स्टेशन में 2 पेंडिंग केस पड़े हुए हैं। वाजे ने उसे फँसाने की धमकी दी थी।
वाजे ने उसे लालच दिया था कि अगर वो कमरा बुक करवाता है तो उसे दोनों केस से निकाल दिया जाएगा। 25 लाख रुपए में से 13 लाख कैश ट्रेवल एजेंट ने होटल को दिए थे। बताया जा रहा है कि सचिन वाजे को पहले से आशंका थी कि उसे छिपना पड़ सकता है, इसीलिए उसने पहले ही इसकी व्यवस्था कर ली थी। 4 दिन वाजे वहाँ रुका था और कई लोग उससे मिलने आए थे। NIA को 35 कैमरा फुटेज मिले हैं।
स्वर्ण कारोबारी को वाजे ने 3 बड़े होटलों का विकल्प दिया था- ताज, ट्राइडेंट और ओबेरॉय। तीनों ही उसके दफ्तर के करीब थे। फरवरी 16-20 तक वाजे उस होटल में रुका था और उसके साथ एक महिला को भी देखा गया। इस महिला की पहचान अब तक बाहर नहीं आई है, लेकिन NIA ने उसे चिह्नित कर समन भेजने की तैयारी कर ली है।
कहा जा रहा है कि ‘क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU)’ हेड रहते किसी मामले में पूछताछ के लिए वाजे ने उस महिला को बुलाया था। वाजे होटल में 5 काला रंग का बैग लेकर घुसा था। बैग में क्या था और वो अभी कहाँ हैं, इस पर जाँच हो रही है। फर्जी आधार में जन्मतिथि जून 15, 1972 लिखा था, जबकि वाजे की जन्मतिथि फरवरी 22, 1972 है।
वाजे का करीबी रियाजुद्दीन काजी ही उसके खिलाफ अप्रूवर बनने के लिए तैयार हो गया है। काजी को सचिन वाजे की आवासीय सोसाइटी के CCTV सबूतों को नष्ट करने के आरोप में पकड़ा गया था। काजी भी मुंबई पुलिस का अधिकारी है। वाजे ने कई लक्जरी कारों का प्रयोग किया था, जिनमें से कई जब्त की जा चुकी हैं। अब मनसुख हिरेन मामले की जाँच भी ATS की जगह NIA करेगी।
उधर महाराष्ट्र के गृह मंत्री और NCP नेता अनिल देशमुख ने अपने खिलाफ लगाए के आरोपों की जाँच की माँग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इसके लिए पत्र भी लिखा है। देशमुख ने कहा, “परमबीर सिंह द्वारा मुझ पर लगाए गए आरापों की जाँच करवा कर ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ करने कि माँग मैंने माननीय मुख्यमंत्री महोदय से की थी। अगर वो जाँच के आदेश देते हैं तो मैं उसका स्वागत करूँगा।” इससे पहले पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह इस मामले की CBI जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट गए थे, जहाँ इन आरोपों को गंभीर बताते हुए उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट जाने को कहा।
महाराष्ट्र में रोज बदलते घटनाक्रम के बीच ये भी खबर आई है कि संजय राउत ने अपने दिल्ली स्थित आवास पर एक रात्रिभोज का आयोजन किया था, जिसके लिए कई भाजपा सांसदों को भी निमंत्रण भेजा गया था। संजय राउत ने सभी दावों को खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि ट्रांसफर रैकेट मामले के बारे में कुछ भी गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा की मजबूत महागठबंधन सरकार को अस्थिर करने का प्रयास है।





